पिछले साल वनडे विश्व कप जीतने के कारण महिला टी20 विश्व कप 2026 में भारतीय टीम से काफी उम्मीदें थीं। हरमनप्रीत कौर की अगुवाई वाली टीम को खिताब का प्रबल दावेदार भी माना जा रहा था। हालांकि, रविवार को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मिली हार के साथ ही टी20 वर्ल्ड कप चैंपियन बनने का सपना एक बार फिर अधूरा रह गया।
मध्यक्रम की धीमी बल्लेबाजी:भारतीय टीम को स्मृति मंधाना और शेफाली वर्मा की जोड़ी ने कई मुकाबलों में ताबड़तोड़ शुरुआत दी, लेकिन मध्यक्रम की धीमी बल्लेबाजी टीम को काफी महंगी पड़ी। खासतौर पर जेमिमा रोड्रिग्स जरूरत से ज्यादा धीमी बैटिंग करती नजर आईं, जिसका खामियाजा भारतीय टीम को भुगतना पड़ा। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भी जेमिमा ने 34 रन बनाने के लिए 28 गेंदें खेलीं। बीच के ओवरों में अधिक डॉट गेंदें खेलने का भी भारतीय टीम को नुकसान उठाना पड़ा। खुद कप्तान हरमनप्रीत का पूरे टूर्नामेंट में स्ट्राइक रेट 131 का ही रहा।
खराब फील्डिंग और कैच छोड़ना पड़ा भारी: भारतीय टीम की टूर्नामेंट में फील्डिंग बेहद साधारण रही। खिलाड़ियों ने मुकाबले के कई अहम मौके पर कैच छोड़े। इसके साथ ही भारतीय फील्डर्स ने खराब फील्डिंग के कारण कई अतिरिक्त रन भी दिए, जो टीम को अंत में भारी पड़े। खराब फील्डिंग की वजह से भारतीय गेंदबाज विपक्षी टीम की बल्लेबाजों पर दबाव बनाने में नाकाम रहीं।