अफगानिस्तान के लिए खेले खब्बू तेज गेंदबाज शापूर जादरान का दिल्ली में, खराब इम्यून कंडीशन (इम्यून सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया था) के इलाज के दौरान (अपने 39वें जन्मदिन से एक दिन पहले) निधन हो गया। अफ़ग़ानिस्तान क्रिकेट को शुरू में मजबूती देने वाले खिलाड़ियों में से एक थे शापूर और यहां क्रिकेट की चर्चा के शुरू के दौर (2000 और 2010 के दशक) में उन्हें अफगानिस्तान का सबसे चर्चित क्रिकेटर गिनते थे।
उन्हें अक्सर अफ़ग़ानिस्तान का वसीम अकरम भी कहते थे। 6'2" लंबे, लहराते लंबे बालों के साथ दौड़ते हुए जब तेज गेंदबाजी करते थे तो बड़े आकर्षक लगते थे। विदेशी लीग (बांग्लादेश) में खेलने वाले पहले अफगानी खिलाड़ी भी थे। इतने लोकप्रिय कि अफग़ानिस्तान के एक अरबपति मीरवाइज अजीजी (जो यूएई में रहते हैं) ने भारत में उनके इलाज का पूरा खर्च उठाया।
2009 से 2020 के बीच 44 वनडे और 36 टी20 इंटरनेशनल खेले और 80 विकेट लिए। वे वही क्रिकेटर थे जिसने 2015 में स्कॉटलैंड के विरुद्ध,अपने देश को पहली वर्ल्ड कप जीत दिलाई थी। सिर्फ उसी वर्ल्ड कप में खेले और 10 विकेट लिए, जो उस टूर्नामेंट में अफगानिस्तान की तरफ से सबसे ज्यादा विकेट थे। साथ में चार टी20 वर्ल्ड कप (2010 से 2016 तक) भी खेले और 9 मैचों में 9 विकेट लिए। राशिद खान और असगर अफगान जैसे और कई युवा खिलाड़ियों के लिए वे प्रेरणा और गाइड थे।
शापूर का जन्म अफगानिस्तान के लोगर में हुआ लेकिन देश में अस्थिरता के माहौल को देखते हुए उनका परिवार पाकिस्तान में पेशावर चला गया। वहीं क्रिकेट खेला और मेहनत की तथा सपना था कि एक दिन पाकिस्तान के लिए खेलना है। तब तक अफगानिस्तान में हालात बेहतर हो गए और इसलिए वे वापस लौट आए। अगस्त 2009 में नीदरलैंड के विरुद्ध वनडे डेब्यू किया। इसमें प्रदर्शन 4-24 रहा जो संयोग से करियर का ही सबसे बेहतर प्रदर्शन रहा। इस तरह उन चुनिंदा खिलाड़ियों में से एक हैं जिनके नाम अपने डेब्यू मैच में करियर के सबसे बेहतर प्रदर्शन का रिकॉर्ड है। कुछ ही महीने बाद, टी20 इंटरनेशनल में भी डेब्यू (आयरलैंड के विरुद्ध) किया और इस फॉर्मेट में सबसे बेहतर प्रदर्शन (3-40), 2018 में देहरादून में बांग्लादेश के विरुद्ध जीत में दिखाया था।
पिछले साल अक्टूबर में जब शापूर बीमार हुए तो उन्हें बेहतर इलाज के लिए भारत जाने की सलाह मिली। तेजी से उन्हें वीजा दिलाया जिसमें आईसीसी चेयरमैन जय शाह ने भी मदद की। शुरू में इलाज का बड़ा अच्छा नतीजा रहा और कुछ हफ़्तों बाद वे अस्पताल से बाहर आ गए थे। गड़बड़ ये हुई कि कुछ ही दिन बाद फिर से इंफेक्शन हो गया। दोबारा अस्पताल में भर्ती हुए पर इस बार वापस नहीं लौट पाए।
शापूर जादरान से पहले, किसी गैर-भारतीय क्रिकेटर की, भारत में इलाज की इससे पिछली मिसाल सिमी सिंह (आयरलैंड) की है। उन्हें 2024 में जानलेवा लिवर फेलियर (जिसके लिए ट्रांसप्लांट की जरूरत थी) के इलाज के लिए भारत लाए थे। वे आयरलैंड में बीमार हुए पर जब इलाज के बावजूद ठीक नहीं हो रहे थे तो इलाज के लिए अपने देश भारत लौट आए।
शापूर जादरान की उनके 39वें जन्मदिन से भी पहले मौत की खबर से एकदम ऐसा लगा कि शायद वह इस दुनिया से जाने वाले सबसे कम उम्र के और पहले अफगानिस्तान खिलाड़ी हैं। असल में, ऐसा नहीं है। ओडीआई खेले क्रिकेटरों की मौत से जुड़े कुछ फैक्ट इस तरह हैं: