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वर्ल्ड कप फ्लैशबैक - कैसे मिला 1987 में भारत को विश्व कप की मेजबानी का मौका?

by Sahir Usman May 18, 2019 • 12:57 PM

दिलचस्प बात यह है कि भारत और पाकिस्तान के पास उतने पैसे नहीं थे जितना कि उन्होंने प्रस्ताव में बताया था। दोनों देशों के क्रिकेट बोर्ड के सामने अब पैसे जुटाने की एक बड़ी समस्या थी और इसके लिए उन्होंने विदेशों की कई मल्टी नेशनल कंपनियों से बात की जिसमें हिंदुजा, कोका कोला और जिलेट जैसी कंपनियां शामिल थी। इन सभी ने अपने हाथ खड़े कर लिए। कहा जाता है कि इस वर्ल्ड कप के सफल आयोजन के लिए तकरीबन 4 करोड़ रुपये की जरूरत थी जिसका प्रबंध होना मुश्किल लग रहा था।

भारत और पाकिस्तान के इस मुश्किल समय में उनका साथ दिया भारत की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस टेक्सटाइल्स ने। बीसीसीआई ने अपना वर्ल्ड कप का प्रस्ताव धीरूभाई अंबानी के सामने रखा और रिलायंस ने इस शर्त पर उनके प्रस्ताव को कबूल किया की अगर भारत में वर्ल्ड कप होता है तो रिलायंस उसके हर विभाग की स्पॉन्सर होगी। रिलायंस के तरफ से इस वर्ल्ड कप प्रोजेक्ट को लीड किया अनिल अंबानी ने।

रिलायंस कंपनी ने वर्ल्ड कप के आयोजन के लिए करीब 2.18 मिलियन पाउंड्स देने की हामी भरी जो कि तब एक बहुत बड़ी रकम थी। रिलायंस की एक और सब-कंपनी 'मुद्रा' ने स्टेडियम के अंदर भी ब्रांडिंग की जिसके कारण हर मुकाबलें में दर्शकों का एक बड़ा हुजूम स्टेडियम में मैच देखने एकत्रित होता था।

रिलायंस के मदद से इस 1987 वर्ल्डकप का बहुत सफल आयोजन हुआ। जब मैच दर मैच इस वर्ल्ड कप की प्रसिद्धि बढ़ने लगी तो भारत की कई और कंपनियों ने भी बीसीसीआई के साथ हाथ मिलाने की कोशिश लेकिन बीसीसीआई के अध्यक्ष साल्वे ने उन कंपनियों को यह कहकर मना कर दिया कि "जब हमें जरूरत थी तब कोई भी कंपनी आगे नहीं आयी और अब इस वर्ल्ड कप के स्पॉंसर का जिम्मा हम रिलायंस को छोड़कर और किसी को नहीं देंगे।"

1987 World Cup

इस टूर्नामेंट के दैरान रिलायंस ने खिलाड़ियों के वाहन, खान-पान,रहने के होटल सहित कई और सुविधाओं की जिम्मेदारी उठायी और इसे प्रभावशाली तरीके से निभाया भी। रिलायंस की मदद से टूर्नामेंट के इतने सफल आयोजन ने भारत को क्रिकेट जगत में एक नई पहचान दिलाई।

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Shubham