देवेंद्र झाझरिया की गिनती भारत के सबसे सफल पैरा एथलीट्स में होती है, जिन्होंने जैवलिन थ्रो में भारत के लिए 3 पैरालंपिक पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। बचपन में दुर्घटना में एक हाथ गंवाने के बावजूद देवेंद्र ने हार नहीं मानी। उनकी उपलब्धियां संघर्ष, दृढ़ संकल्प और उत्कृष्ट खेल भावना की प्रेरक मिसाल हैं।
10 जून 1981 को राजस्थान के चुरू में जन्मे देवेंद्र बेहद उत्साही बच्चे थे, लेकिन एक हादसे ने उनकी जिंदगी बदल दी। एक पेड़ पर चढ़ते समय शाखा पर लिपटे बिजली के हाई वोल्टेज तार के संपर्क में आने के बाद ग्रामीणों ने देवेंद्र को पेड़ से उतारा। लोगों को ऐसा लगा कि वह मर गए हैं, लेकिन डॉक्टरों ने तुरंत बायां हाथ काटने की सलाह दी। उस समय देवेंद्र महज 8 साल के थे।
देवेंद्र समझ गए थे कि अब जिंदगी पहले जैसी नहीं रहेगी। वह न तो दोस्तों से पहले की तरह मिलते-जुलते, न ही उनके साथ खेल पाते, क्योंकि दूसरे बच्चे उन्हें बोझ समझते थे।