मौजूदा समय में बैडमिंटन भारत के शीर्ष खेलों में शुमार है। महिला खिलाड़ियों की संख्या भी बैडमिंटन में तेजी से बढ़ी है। साइना नेहवाल और पीवी सिंधु महिला बैडमिंटन में देश में बड़ा नाम रही हैं, लेकिन इन दोनों खिलाड़ियों से पहले एक और खिलाड़ी थीं, जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और लगन से नेहवाल और सिंधु जैसे खिलाड़ियों के लिए इस खेल में आने का रास्ता आसान बनाया। उस दिग्गज खिलाड़ी का नाम मधुमिता बिष्ट है।
मधुमिता बिष्ट का जन्म 5 अक्टूबर 1964 को जलपाईगुड़ी, पश्चिम बंगाल में हुआ था। काफी कम उम्र से बैडमिंटन में रुचि रखने और इस खेल में बड़ी उपलब्धि हासिल करने का इरादा रखने वाली मधुमिता आठ बार की राष्ट्रीय एकल चैंपियन, नौ बार की युगल विजेता और बारह बार की मिश्रित युगल विजेता हैं। उनकी सफलता बताती है कि राष्ट्रीय स्तर पर बैडमिंटन में उनका कितना दबदबा था।
'उत्तराखंड की बैडमिंटन क्वीन' के नाम से मशहूर मधुमिता ने 1992 के ओलंपिक में महिला एकल स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। मधुमिता ने पहले राउंड में आइसलैंड की एल्सा नीलसन को हराया था, लेकिन दूसरे राउंड में ग्रेट ब्रिटेन की जोआन मुगेरिज से हारकर उनका सफर समाप्त हो गया था।