Murali Sreeshankar: ''मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।" भारत के स्टार लॉन्ग जंप खिलाड़ी मुरली श्रीशंकर पर यह लाइनें पूरी तरह से फिट बैठती हैं। मुरली का वो हौसला ही था, जिसने उन्हें कभी नहीं हारने दिया। इंजरी ने मुरली को कई बार तोड़ने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
मुरली श्रीशंकर का जन्म 27 मार्च 1999 को केरल के पलक्कड़ में हुआ। मुरली एक एथलेटिक परिवार से ही थे, और उनके पिता एस. मुरली खुद एशियाई खेल पदक विजेता रहे थे, जबकि मां के.एस. बिजिमोल भी पूर्व एथलीट थीं।
मुरली ने महज 4 साल की उम्र में दौड़ लगाना शुरू कर दिया था। 13 साल की उम्र में उन्होंने ट्रिपल जंप और फिर लॉन्ग जंप में अपना करियर बनाने की ठान ली। मुरली इस खेल में रमते चले गए और एक के बाद कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं। हालांकि, साल 2018 में वह अपेंडिसाइटिस की बीमारी से ग्रस्त हो गए, जिसके चलते वह कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा नहीं ले सके।