'हौसलों के तरकश में कोशिश का वो तीर जिंदा रखो, हार जाओ चाहे जिंदगी में सब कुछ, मगर फिर से जीतने की उम्मीद जिंदा रखो।' ये पंक्तियां भारत के स्टार पैरा भाला फेंक खिलाड़ी सुमित अंतिल पर सटीक बैठती हैं। महज सात साल की उम्र में पिता को खोने वाले सुमित की जिंदगी एक हादसे के बाद पूरी तरह बदल गई, लेकिन अपने मजबूत इरादों और अथक मेहनत के दम पर उन्होंने लगातार दो पैरालंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया।
सुमित का जन्म 7 जून, 1998 को हरियाणा के सोनीपत जिले के खेवड़ा गांव में हुआ था। जब वह केवल सात वर्ष के थे, तब उनके सिर से पिता का साया उठ गया। इसके बाद उनकी मां ने चारों बच्चों का पालन-पोषण कठिन मेहनत के बल पर किया।
सुमित पढ़ाई में भी काफी अच्छे थे, लेकिन 12वीं कक्षा के दौरान उनकी जिंदगी में एक बड़ा हादसा हो गया। ट्यूशन से बाइक पर घर लौटते समय वह गंभीर सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए, जिसमें उन्हें अपना एक पैर गंवाना पड़ा। इस घटना के बाद वह निराशा से घिरने लगे।