भारत की साइकिलिस्ट और पर्वतारोही आशा मालवीय ने देश की महिलाओं को खास संदेश दिया है। उनका कहना है कि महिलाओं को अपने सपने पूरे करने के लिए घर से बाहर निकलने की जरूरत है। 78वें आर्मी डे के अवसर पर जयपुर से साइकलिंग पर निकलीं आशा शनिवार को असम के बिश्वनाथ पहुंचीं।
आशा ने 'आईएएनएस' के साथ बात करते हुए बताया, "मैं 11 जनवरी से 78वें आर्मी डे के अवसर पर जयपुर से निकली हूं। जयपुर से साइकलिंग करते हुए मैं असम के बिश्वनाथ चार्ली पहुंची हूं। मुझे लगभग 4 महीने से ज्यादा का समय हो गया है। मैं 7700 से ज्यादा किलोमीटर की यात्राएं पूरी कर चुकी हूं। इससे पहले मैं संपूर्ण भारत में 26,000 किलोमीटर साइकलिंग महिला सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से पूरी कर चुकी हूं। उसके बाद मैंने कन्याकुमारी से सियाचिन, सियाचिन से उमलिंगला, उमलिंगला से दिल्ली, और दिल्ली से भोपाल तक की साइकिल यात्राएं की हैं।"
भारत की साइकिलिस्ट और पर्वतारोही आशा मालवीय ने देश की महिलाओं को खास संदेश दिया है। उनका कहना है कि महिलाओं को अपने सपने पूरे करने के लिए घर से बाहर निकलने की जरूरत है। 78वें आर्मी डे के अवसर पर जयपुर से साइकलिंग पर निकलीं आशा शनिवार को असम के बिश्वनाथ पहुंचीं।