कर्नाटक के स्टार बल्लेबाज और कप्तान देवदत्त पडिक्कल को देखकर ऐसा लग रहा है कि वो किसी अलग ही मिशन पर हैं। वो इस समय ऐसी फॉर्म में चल रहे हैं जिसे सेलेक्टर्स के लिए भी नजरअंदाज करना बहुत मुश्किल होगा। उन्होंने सोमवार को उत्तराखंड के खिलाफ रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल में अपनी पहली डबल सेंचुरी लगाकर हर किसी का ध्यान खींचा है।
लखनऊ के इकाना स्टेडियम में बैटिंग करते हुए, बाएं हाथ के इस खिलाड़ी ने प्रेशर में ज़बरदस्त पारी खेली। पडिक्कल ने 288 गेंदों में डबल सेंचुरी लगाकर कई रिकॉर्ड्स भी ध्वस्त कर दिए। कर्नाटक की पारी की शुरुआत ओपनर मयंक अग्रवाल के जल्दी आउट होने से हुई, लेकिन इसके बाद एक पार्टनरशिप हुई जिसने मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया। पडिक्कल ने केएल राहुल के साथ मिलकर 278 रनों की बड़ी पार्टनरशिप की, जिससे कर्नाटक ये मैच जीतने की दौड़ में आ गया है।
राहुल आखिरकार 141 रन पर आउट हो गए लेकिन पडिक्कल बिना घबराए खेलते रहे और फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में लंबे समय से डबल सेंचुरी के सूखे को भी खत्म कर दिया। इससे पहले पडिक्कल का फर्स्ट क्लास क्रिकेट में सबसे बड़ा स्कोर 193 रन था। पडिक्कल आखिर में 330 गेंदों पर शानदार 232 रन बनाकर आउट हुए, जिसमें उन्होंने 29 चौके और तीन छक्के लगाए। अपने 116वें रन के साथ, कर्नाटक के कप्तान ने फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में 3,500 रन भी पूरे कर लिए। अब उनके नाम 53 मैचों में 42 की औसत से 3,616 से ज़्यादा रन हैं, जिसमें नौ सेंचुरी और 19 हाफ-सेंचुरी शामिल हैं।
इसके साथ ही पडिक्कल कर्नाटक के लिए डबल सेंचरी लगाने वाले तीसरे कप्तान भी बन गए हैं। इससे पहले कर्नाटक के लिए कप्तान के रूप में फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 1990 के बाद से 3 बार राहुल द्रविड़ और 2 बार मयंक अग्रवाल ने डबल सेंचुरी लगाई है लेकिन अब पडिक्कल भी इस लिस्ट में शामिल हो गए हैं। इतना ही नहीं, पडिक्कल ने अपने इस शानदार प्रदर्शन से एक बार फिर से सेलेक्टर्स का ध्यान खींचा है।
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पडिक्कल को पहले ही टेस्ट क्रिकेट का थोड़ा अनुभव हो चुका है और उन्होंने भारत के लिए दो टेस्ट खेले हैं। उन्होंने भारत के लिए खेली गई तीन पारियों में 90 रन बनाए, जिसमें 2024 में धर्मशाला में इंग्लैंड के खिलाफ 65 रन की डेब्यू हाफ-सेंचुरी भी शामिल है। ऐसे में अगर पडिक्कल को दोबारा मौका दिया जाता है तो शायद वो अपनी इस शानदार फॉर्म का फायदा उठा सकते हैं।