टीम इंडिया (Team India) के पूर्व फील्डिंग कोच आर श्रीधर (R Sridhar) ने अपनी किताब में खुलासा किया है कि रवि शास्त्री (Ravi Shastri) ने 2018 में इंग्लैंड के खिलाफ एकदिवसीय मैच में महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) की धीमी बल्लेबाजी पर अपना आपा खो बैठे थे। मामला लॉर्ड्स में खेले गए इंग्लैंड और भारत के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज के दूसरे मैच का है। जो रूट (Joe Root) के शतक से इंग्लैंड ने 7 विकेट पर 322 का स्कोर खड़ा किया।
टीम इंडिया के पूर्व हेडकोच रवि शास्त्री (Ravi Shastri) को कई मौकों पर खुलकर महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) की तारीफ करते हुए सुना गया है। रवि शास्त्री धोनी की काफी इज्जत करते हैं इस बात में कोई दोराय नहीं है। हालांकि, एक ऐसा मौका आया जब रवि शास्त्री धोनी की धीमी पारी देखकर काफी ज्यादा गुस्सा हो गए थे। टीम इंडिया (Team India) के पूर्व फील्डिंग कोच आर श्रीधर (R Sridhar) ने अपनी किताब में इस राज से पर्दा उठाया है।
टीम इंडिया इंग्लैंड के खिलाफ 3 मैचों की वनडे सीरीज खेल रही थी। लॉर्ड्स में खेले गए इंग्लैंड और भारत के बीच दूसरे वनडे के दौरान ये वाक्या घटा था। इंग्लैंड ने पहले बैटिंग करते हुए 7 विकेट के नुकसान पर 322 का स्कोर बनाया था। विराट कोहली (Virat Kohli) और सुरेश रैना (Suresh Raina) ने इस मैच में शानदार बल्लेबाजी की थई लेकिन, इन दोनों खिलाड़ियों के आउट होने के बाद टीम इंडिया धोनी के रहने के बावजूद दोबारा मैच में वापस नहीं आ सकी थी।
आर श्रीधर ने मैच के बाद हुए वाक्ये का जिक्र करते हुए अपनी किताब में लिखा, 'फाइनल मैच हेडिंग्ले के मैदान में खेला जाना था। एक टीम मीटिंग होनी थी जहां सहयोगी स्टाफ के सभी सदस्यों सहित पूरी टीम मौजूद थी। मुझे पता था कि रवि कड़ा संदेश देने वाले हैं। रवि शास्त्री ने उस मीटिंग में कहा कि आप कोई भी हों, ऐसा फिर नहीं होना चाहिए कि हम मैच जीतने की कोशिश किए बगैर ही हार जाएं। मेरे रहते ऐसा दोबारा नहीं होगा। अगर कोई ऐसा करता है, तो वह मेरे रहते अपना आखिरी क्रिकेट मैच खेलेगा। आप मैच हार सकते हैं, इसमें कोई शर्म की बात नहीं है, लेकिन आप इस तरह नहीं हारेंगे।'
बता दें कि टीम इंडिया इस मुकाबले को 86 रनों से हार गई थी। जिस वक्त धोनी बल्लेबाजी कर रहे थे उस वक्त सारे बैटर आउट हो चुके थे। टीम इंडिया को अंतिम 10 ओवर में 13 रन प्रति ओवर के हिसाब से रन बनाना था बावजूद इसके टीम इंडिया अगले 6 ओवर में केवल 20 रन ही बना सकी थी। रवि शास्त्री इसी बात को लेकर नाराज थे कि टीम इंडिया लड़कर नहीं हारी और लक्ष्य हासिल करने की कोशिश तक नहीं की।