भारतीय हॉकी टीम की पारंपरिक नीली जर्सी की जगह भगवा रंग की जर्सी लाए जाने की खबर के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान विरेन रस्किन्हा ने इस बदलाव पर चिंता जताई है। वहीं भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने इसे सामान्य बदलाव बताते हुए इसका समर्थन किया है। दूसरी ओर विपक्षी दलों ने इस फैसले को प्रतीकों और पहचान से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं।

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भाजपा सांसद जगन्नाथ सरकार ने कहा कि सरकार को रंग बदलने का फैसला लेने का अधिकार है। क्या हुआ अगर रंग बदल दिया गया? सत्ता में आने के बाद वे जो चाहें, कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में मौजूद थे और जिस विषय पर जवाब देना था, उसका उत्तर पहले से तय व्यवस्था के तहत केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने दिया।

केसरिया को लेकर उठ रहे विवाद पर उन्होंने कहा, "यह सब छोटी मानसिकता का परिचायक है। अगर भगवा रंग की जर्सी हो गई, तो इसमें क्या दिक्कत है?"

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने भी केसरिया रंग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भारत क्रांतिकारियों की धरती है और केसरिया रंग देश की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनके मुताबिक इस रंग पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

वहीं, समाजवादी पार्टी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने इस प्रस्तावित बदलाव पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लंबे समय से भारतीय खेल टीमों, खासकर क्रिकेट और हॉकी में नीला रंग देश की पहचान बन चुका है।

उन्होंने कहा कि जब भी भारतीय टीम किसी बड़े टूर्नामेंट में उतरती है तो "ब्लीड ब्लू" का नारा लगाया जाता है। उनके अनुसार नीला रंग एक तटस्थ और प्रेरणादायक रंग रहा है तथा इस तरह का बदलाव अनावश्यक विवाद पैदा कर सकता है। सरकार को जनता की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए और रंगों तथा प्रतीकों को राजनीतिक नजरिए से देखने से बचना चाहिए।

समाजवादी पार्टी के नेता उदयवीर सिंह ने भी कहा कि जिस जर्सी को पहनकर भारतीय टीम वर्षों तक खेलती रही है, उससे खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों का भावनात्मक जुड़ाव होना स्वाभाविक है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस बदलाव के पीछे की वास्तविक वजह हॉकी इंडिया फेडरेशन ही स्पष्ट कर सकता है।

उन्होंने कहा कि जब भी भारतीय टीम किसी बड़े टूर्नामेंट में उतरती है तो "ब्लीड ब्लू" का नारा लगाया जाता है। उनके अनुसार नीला रंग एक तटस्थ और प्रेरणादायक रंग रहा है तथा इस तरह का बदलाव अनावश्यक विवाद पैदा कर सकता है। सरकार को जनता की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए और रंगों तथा प्रतीकों को राजनीतिक नजरिए से देखने से बचना चाहिए।

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इस पूरे विवाद के बीच तृणमूल कांग्रेस के सांसद और पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने कहा कि जर्सी का रंग चाहे नारंगी हो, हरा हो या कोई अन्य, असली महत्व खिलाड़ियों के प्रदर्शन का होता है। उन्होंने कहा कि क्रिकेट में खिलाड़ी लंबे समय तक सफेद कपड़ों में खेलते रहे हैं और सफलता कभी कपड़ों के रंग से नहीं, बल्कि मैदान पर किए गए प्रदर्शन से तय होती है।

Article Source: IANS

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