साउथ अफ्रीका के पूर्व दिग्गज फील्डर जोंटी रोड्स का मानना है कि इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में 'इम्पैक्ट प्लेयर' नियम ने बल्लेबाजी के लिए एक ऐसा माहौल बना दिया है, जिसमें गेंदबाजों पर लगातार दबाव बना रहता है। सिर्फ बेहतरीन फील्डिंग ही उन्हें कुछ राहत दे सकती है।

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यूरोपियन टी20 प्रीमियर लीग (ईटीपीएल) में रॉटरडैम फ्रेंचाइजी के सह-मालिक रोड्स की यह टिप्पणी आईपीएल 2026 सीजन में गेंदबाजों के लिए बेहद मुश्किल हालात के बीच आई है, जहां दिग्गज तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह के खिलाफ भी बल्लेबाजों ने जमकर रन बटोरे हैं और वे 7 मुकाबलों में सिर्फ 2 विकेट ही ले पाए हैं। बल्ले और गेंद के बीच असंतुलन ने इस बात पर बहस छेड़ दी है कि क्या टूर्नामेंट के खेलने के नियम बल्लेबाजों के पक्ष में बहुत ज्यादा झुक गए हैं, खासकर 'इम्पैक्ट प्लेयर' नियम के आने के बाद।

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रोड्स ने 'इम्पैक्ट प्लेयर' नियम को लेकर कहा कि इससे टीम में एक अतिरिक्त बल्लेबाज शामिल हो जाता है, जिससे 20 ओवर के पूरे मैच में आक्रामक क्रिकेट खेलना आसान होता है।

उन्होंने कहा, "इस नियम के कारण आपके पास एक अतिरिक्त बल्लेबाज होता है, इसलिए आप लगातार जोखिम ले सकते हैं। आप चाहें तो एक अतिरिक्त गेंदबाज भी शामिल कर सकते हैं, लेकिन टी20 क्रिकेट में पिचें अक्सर बल्लेबाजी के अनुकूल होती हैं और गेंदबाजों को ज्यादा फायदा नहीं मिलता।"

रोड्स ने आगे समझाया कि पहले टी20 में अगर शुरुआती विकेट गिर जाते थे, तो टीमें 8 से 12 या 14 ओवर तक पारी को संभालने की कोशिश करती थीं और फिर अंतिम 6 ओवरों में तेजी से रन बनाती थीं, लेकिन अब, अतिरिक्त बल्लेबाज होने के कारण बल्लेबाज शुरुआत से ही आक्रामक खेलते हैं और मिडिल ओवर्स में भी दबाव बनाए रखते हैं, जिससे खेल का पैटर्न पूरी तरह बदल गया है।

अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 52 टेस्ट और 254 वनडे मैच खेलने वाले रोड्स ने अपने दौर के सबसे बेहतरीन फील्डर्स के तौर पर पहचान बनाई। इसके बाद में मुंबई इंडियंस और लखनऊ सुपर जायंट्स के कोचिंग स्टाफ का भी हिस्सा रहे। रोड्स का मानना है कि फील्डर्स पर यह दबाव पहले कभी इतना ज्यादा नहीं रहा कि वे उन रनों की भरपाई करें, जो गेंदबाजों ने लुटा दिए हैं।

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उन्होंने कहा, "इम्पैक्ट प्लेयर के नजरिए से देखें, तो इसका मतलब है कि बल्लेबाज लगातार एक के बाद एक गेंद पर आप पर हमला करते रहते हैं। इसलिए, 'इम्पैक्ट प्लेयर' नियम के बिना आईपीएल के बाहर आपको ऐसा अक्सर देखने को नहीं मिलता, लेकिन शुरुआत से ही, आपको अपनी फील्डिंग में पूरी तरह से मुस्तैद रहना होगा, क्योंकि एक रन भी बड़ा फर्क पैदा कर सकता है। आपको अपने गेंदबाजों की मदद करनी होगी, और मैदान पर लिया गया वह शानदार कैच या बेहतरीन रन-आउट, सचमुच दोनों टीमों के बीच का फर्क साबित हो सकता है, क्योंकि विकेट लेना अपने आप में ही काफी मुश्किल काम है। अगर आप मैदान पर कुछ शानदार कर दिखाते हैं और गेंदबाजों की मदद करते हैं, तो अक्सर यही बात हार और जीत के बीच का फर्क बन जाती है।"

अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 52 टेस्ट और 254 वनडे मैच खेलने वाले रोड्स ने अपने दौर के सबसे बेहतरीन फील्डर्स के तौर पर पहचान बनाई। इसके बाद में मुंबई इंडियंस और लखनऊ सुपर जायंट्स के कोचिंग स्टाफ का भी हिस्सा रहे। रोड्स का मानना है कि फील्डर्स पर यह दबाव पहले कभी इतना ज्यादा नहीं रहा कि वे उन रनों की भरपाई करें, जो गेंदबाजों ने लुटा दिए हैं।

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उन्होंने कहा, "मुझे इस बारे में पता है, लेकिन इसमें सबसे ज्यादा ध्यान फील्डिंग पर देना होगा, क्योंकि मैदान पर फील्डर्स से गेंदबाजों को थोड़ी कम मदद मिल पा रही है। साथ ही, यह भी न भूलें कि इन टूर्नामेंट्स में 'इम्पैक्ट प्लेयर' का नियम लागू नहीं होगा। ऐसे में ऑलराउंडर्स की भूमिका और भी ज्यादा अहम हो जाएगी। इसके अलावा, टीम में एक बल्लेबाज कम होगा, जिससे मुकाबला थोड़ा और संतुलित हो जाएगा, लेकिन आप बिल्कुल सही कह रहे हैं। मेरा मतलब है कि अगर बल्लेबाज हावी हो रहे हैं, तो फील्डर्स को अपने गेंदबाजों का साथ देने पर खास ध्यान देना होगा।"

Article Source: IANS
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