दांबुला में श्रीलंका ए और भारत ए के बीच त्रिकोणीय सीरीज के फाइनल मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी ने एक बार फिर अपनी बल्लेबाजी का करिश्मा दिखाया और महज 29 गेंदों पर 94 रन की विस्फोटक पारी खेली। इस दौरान मात्र 11 गेंदों पर उन्होंने अपना अर्धशतक पूरा किया। यह लिस्ट ए क्रिकेट में सबसे तेज अर्धशतक का रिकॉर्ड है।

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वैभव की पारी से उनके कोच मनीष झा बेहद खुश नजर आए। उन्होंने कहा कि वैभव के पास गेंद को समझते हुए उस पर शॉट लगाने की, जो क्षमता है, वो किसी अन्य भारतीय बल्लेबाज के पास नहीं है।

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मनीष झा ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "वैभव ने हर मैच में अच्छी शुरुआत की थी, लेकिन वह उसे बड़ी पारी में बदलने में सफल नहीं हो पा रहा था। फाइनल में उन सभी कमियों को दूर करते हुए उसके बल्ले से एक बेहतरीन पारी आई। उसके शुरुआती 50 रन सिर्फ 11 गेंदों में आ गए थे। इस दौरान वैभव ने 5 चौके और 5 छक्के लगाए थे। वैभव की इस पारी की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि गेंद को उसकी मेरिट के हिसाब से खेला और जो बेहतर शॉट हो सकता था, वह उनके बल्ले से आया। अफसोस यह है कि उनका शतक नहीं आया, वरना 30 गेंदों पर शतक वाला रिकॉर्ड भी टूट जाता। मुझे उम्मीद है कि बहुत जल्द ही सबसे तेज शतक वाला रिकॉर्ड भी टूटेगा।"

झा ने कहा, "वैभव अपनी पारी की शुरुआत से ही गेंदबाजों पर हावी हो जाते हैं। यही उनकी बल्लेबाजी की शैली है। वह सिर्फ आईपीएल में नहीं, बल्कि किसी भी स्टेज पर ऐसे ही खेलेंगे। उनका यही अंदाज है। आज की पारी देखिए, वैभव ने हर गेंद को उसकी मेरिट के हिसाब से खेला है और जो बेहतर शॉट हो सकता था, वही लगाया है। वैभव के पास गेंद की लेंथ को समझते हुए शॉट लगाने की अद्भुत क्षमता है। प्रियांश आर्य, ऋतुराज गायकवाड़ और तिलक वर्मा भी अच्छे खिलाड़ी हैं, लेकिन उनके पास वो क्षमता या फ्लो नहीं है। आप उनकी बल्लेबाजी को देखकर अंदाजा लगा सकते हैं। वैभव की जो फॉर्म है, वह कुछ भी कर सकते हैं। यह भारतीय क्रिकेट के लिए अच्छा है।"

मनीष झा ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "वैभव ने हर मैच में अच्छी शुरुआत की थी, लेकिन वह उसे बड़ी पारी में बदलने में सफल नहीं हो पा रहा था। फाइनल में उन सभी कमियों को दूर करते हुए उसके बल्ले से एक बेहतरीन पारी आई। उसके शुरुआती 50 रन सिर्फ 11 गेंदों में आ गए थे। इस दौरान वैभव ने 5 चौके और 5 छक्के लगाए थे। वैभव की इस पारी की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि गेंद को उसकी मेरिट के हिसाब से खेला और जो बेहतर शॉट हो सकता था, वह उनके बल्ले से आया। अफसोस यह है कि उनका शतक नहीं आया, वरना 30 गेंदों पर शतक वाला रिकॉर्ड भी टूट जाता। मुझे उम्मीद है कि बहुत जल्द ही सबसे तेज शतक वाला रिकॉर्ड भी टूटेगा।"

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मनीष झा ने अंत में कहा कि वैभव को अपने क्रिकेट पर फोकस रखना चाहिए और अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए। स्लेजिंग (छिंटाकशी) क्रिकेट का भाग है। इसे समझते हुए वैभव को अपनी क्रिकेट और लंबे करियर पर ध्यान देना चाहिए।

Article Source: IANS
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