भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और मौजूदा समय के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज विराट कोहली ने मंगलवार को नई दिल्ली के डीपीएस आरके पुरम में अपने बचपन के कोच राजकुमार शर्मा के क्रिकेट अकादमी के नए ब्रांच का उद्घाटन किया।
इस कार्यक्रम में दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष रोहन जेटली भी इस उद्घाटन समारोह में मौजूद थे। विराट कोहली ने अपनी क्रिकेट यात्रा राजकुमार शर्मा के मार्गदर्शन में उनकी वेस्ट दिल्ली क्रिकेट अकादमी से ही शुरू की थी।
मौजूद छात्रों को संबोधित करते हुए विराट कोहली ने कहा, "मुझे यहां बुलाने के लिए धन्यवाद। मुझे स्कूलों में बोलने की आदत नहीं है, इसलिए यह मेरे लिए थोड़ा अजीब होगा, क्योंकि मैं क्रिकेट के लिए बहुत पहले ही स्कूल के माहौल से दूर हो गया था, और इसी बारे में मैं बात करने जा रहा हूं। मैं स्कूल के माहौल को समझता हूं। मैं भी उसी प्रक्रिया और दौर से गुजरा हूं, जिसका हिस्सा आप सभी बच्चे अभी हैं। और मैं अपने अनुभव से बस इतना साझा कर सकता हूं कि कैसे मेरे जीवन में बहुत कम उम्र में ही मेरा ध्यान और प्राथमिकताएं बदल गई थीं।"
कोहली ने आगे कहा, "मैं जो कहना चाहता हूं वह यह है कि स्कूल एक ऐसी जगह है जहां आप सीखने आते हैं, आप आगे बढ़ने आते हैं, और आप बेहतर इंसान बनते हैं।"
जीवन में शिक्षकों की भूमिका अहम बताते हुए कोहली ने कहा कि सबसे पहले उनके प्रति सम्मान और आदर रखें। वे आपको अपने जीवन का एक हिस्सा दे रहे हैं। उन्हें वह सम्मान, और वह ध्यान व एकाग्रता देना बहुत जरूरी है, जिसकी आवश्यकता है।
कोहली ने क्रिकेट के प्रति अपनी शुरुआती प्रतिबद्धता और अपने लक्ष्यों में स्पष्टता के बारे में कहा, "मैंने अपनी जिंदगी में बहुत कम उम्र में ही खेल को चुन लिया था, लेकिन यह फैसला मैंने पूरी ईमानदारी से लिया था। मुझे पूरा यकीन था कि मैं क्रिकेट में ही आगे बढ़ना चाहता हूं, और मुझे खुद से, अपने परिवार से और अपने शिक्षकों से भी पूरी तरह ईमानदार रहना था, ताकि मैं उन्हें बता सकूं कि मैं इसी रास्ते पर चलना चाहता हूं।"
जीवन में शिक्षकों की भूमिका अहम बताते हुए कोहली ने कहा कि सबसे पहले उनके प्रति सम्मान और आदर रखें। वे आपको अपने जीवन का एक हिस्सा दे रहे हैं। उन्हें वह सम्मान, और वह ध्यान व एकाग्रता देना बहुत जरूरी है, जिसकी आवश्यकता है।
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अकादमी से जुड़ी अपनी याद को साझा करते हुए कोहली ने कहा, "यह उनकी जिंदगी और बचपन का एक बहुत अहम हिस्सा है। मैंने आठ साल की उम्र में अभ्यास करना शुरू किया था, और जब भी मुझे समय मिलता है, मैं आज भी इस अकादमी में आता हूं। यह मेरे बचपन का एक बहुत बड़ा हिस्सा है, और मुझे उम्मीद है कि जो भी बच्चे यहां क्रिकेट सीखने आते हैं, वे इसकी अहमियत समझेंगे और इस अकादमी से कुछ न कुछ जरूर सीखेंगे। मुझे उम्मीद है कि यह स्कूल और यहां के क्रिकेट सेटअप के लिए भी बहुत शानदार साबित होगा। इसलिए, मैं सभी को शुभकामनाएं देता हूं।"