नई दिल्ली, 17 अप्रैल (हि.स.) । इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के कई शुरुआती मैच देश के बाहर होने से राज्यों को एंटरटेनमेंट टैक्स के रूप में बड़ी कमाई से हाथ धोना पड़ेगा। दिल्ली में इस साल सिर्फ 5 मैच होने हैं, जिससे दिल्ली सरकार को लगभग 35 फीसदी कम टैक्स मिलने का अनुमान है।

दिल्ली सरकार के एंटरटेनमेंट टैक्स ऑफिसर प्रमोद गोयल ने बताया कि पहले मैच के लिए जमा कराए गए अडवांस टैक्स के आधार पर 5 मैचों से करीब 7.5 करोड़ रुपए आने की उम्मीद है, जबकि स्पॉन्सर ऐक्टिविटीज से रिकवरी अलग है।

पिछले साल 6 मैचों से सरकार को 7,40,10,100 रुपये का एंटरटेनमेंट टैक्स मिला था, जिसमें से 1.07 करोड़ रुपये टिकट नहीं बिकने के एवज में रिफंड किए गए थे।बाद में 2 और मैच आने से लगभग 3 करोड़ की अतिरिक्त आय हुई। इस सीजन में प्रमोशनल ऐक्टिविटीज से 2.7 करोड़ रुपये की वसूली हुई।' डिपार्टमेंट के अनुमान के मुताबिक इस साल मैच घट जाने से इस मद में 35 फीसदी से ज्यादा रेवेन्यू घटेगा। आयोजक मैच से महीने भर पहले प्रिंटेड टिकटों के आधार पर सरकार को संभावित टैक्स जमा कराते हैं। उसके बाद वास्तविक बिक्री के आधार पर उन्हें रिफंड मिल जाता है।

पिछले साल दिल्ली डेयरडेविल्स के 2 घरेलू मैच दिल्ली से बाहर कर दिए जाने से शुरू में 6 मैच प्रस्तावित थे, लेकिन बाद में 2 एलिमिनेटर और क्वॉलिफायर मैच चेन्नई से दिल्ली शिफ्ट होने के चलते यहां कुल 8 मैच हुए । क्वॉलिफायर और एलिमिनेटर मैचों में फुल ऑक्युपेंसी के चलते राज्य सरकार को 100 फीसदी टैक्स मिला था। इसके अलावा कुछ खास मैचों में टिकटों के दाम ज्यादा रखे गए थे।

2010 में महाराष्ट्र में आईपीएल मैचों पर एंटरटेनमेंट टैक्स न वसूलने के लिए राज्य सरकार को बॉम्बे उच्च न्यायालय से फटकार सुननी पड़ी थी। न्यायालय ने बड़े पैमाने पर इन्वेस्टमेंट और औद्योगिक घरानों के बिजनेस के बावजूद आईपीएल को टैक्स फ्री करने पर हैरानी जताई थी और राज्यों से कहा था कि वे टैक्स वसूलें। कुछ राज्यों में इसे खेल गतिविधि करार देते हुए एंटरटेनमेंट टैक्स को चुनौती भी दी गई थी, लेकिन अदालतों ने उसे खारिज कर दिया।
हिन्दुस्थान समाचार/सुनील

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Saurabh Sharma
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