आकाश लाल का, 10 अगस्त को नई दिल्ली में 85 साल की उम्र में निधन हो गया। वे उस दौर के भारतीय क्रिकेटर थे जब देश के लिए खेलना क्रिकेटर का सबसे बड़ा सपना होता था। उन्हें तो कभी इंडिया कैप कभी न मिली लेकिन भारतीय क्रिकेट में उनका योगदान, अपने खेल करियर से आगे का रहा। दिल्ली के शानदार ओपनर, नॉर्थ ज़ोन के कप्तान, नेशनल सेलेक्टर और सेलेक्शन रूम में एक प्रभावशाली आवाज रहे आकाश लाल। उन का सबसे यादगार योगदान 1989 के पाकिस्तान टूर के लिए 16 साल के सचिन तेंदुलकर के नाम को सपोर्ट करना था।
आकाश लाल के निधन पर उनके डीडीसीए के साथ संबंध पर भी सवाल उठे। दिल्ली क्रिकेट के साथ उनका जुड़ाव एडमिनिस्ट्रेटिव होने के साथ-साथ, दिल्ली क्रिकेट के सुनहरे दौर के टॉप खिलाड़ियों में से एक के तौर पर भी था। दिल्ली और नॉर्थ ज़ोन के कप्तान रहे और रिटायर होने के बाद भी दिल्ली क्रिकेट से अलग-अलग भूमिका में जुड़े रहे।
जन्म 1940, दाएं हाथ के ओपनिंग बल्लेबाज, फर्स्ट-क्लास करियर 1957-58 से 1975-76 तक, पटियाला, दिल्ली और पंजाब के लिए खेले, कुल 94 फर्स्ट-क्लास मैच जिसमें 41.64 औसत से 5,622 रन, 15 शतक और 26 अर्धशतक के साथ और टॉप स्कोर 1964-65 में जम्मू-कश्मीर के विरुद्ध 209* था। बड़ी सफलता 1963-64 सीजन में मिली जब 48 की औसत से 672 रन बनाए, दो शतक के साथ। इसके बाद 1964-65 में 57.36 की औसत से 631 रन बनाए और एक शानदार दौर की शुरुआत हुई जिसमें उन्होंने 9 में से 8 सीजन में 40 से ज्यादा की औसत से रन बनाए। उनके 209* ने उन्हें घरेलू क्रिकेट में सबसे भरोसेमंद ओपनिंग बल्लेबाज में से एक की पहचान दिलाई।
1960 के दशक के बीच ये चर्चा थी कि वे भारत के ओपनर बन सकते हैं। सेलेक्टर्स को प्रभावित करने का बड़ा मौका 1966 में मिला, जब दिल्ली में गैरी सोबर्स की वेस्टइंडीज टीम के विरुद्ध 'प्राइम मिनिस्टर इलेवन' के लिए खेले और 82 रन बनाए। बहरहाल घरेलू क्रिकेट में शानदार रिकॉर्ड और वेस्टइंडीज के विरुद्ध अच्छे प्रदर्शन के बावजूद, उन्हें भारत के लिए खेलने का मौका नहीं मिला।
1989-90 और 1990-91 के दौरान नॉर्थ ज़ोन के प्रतिनिधि के तौर पर भारत की सेलेक्शन कमेटी में रहे। 1989 में, जब पाकिस्तान टूर के लिए भारतीय टीम चुन रहे थे, तब सचिन तेंदुलकर सिर्फ़ 16 साल के थे। लाल का मानना था कि इस युवा खिलाड़ी में इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने का टेम्परामेंट और टैलेंट है और वे उन सेलेक्टर में थे जिन्होंने तेंदुलकर को टीम में लेने को सपोर्ट किया।
2013 में, जब तेंदुलकर अपने आखिरी टेस्ट खेल रहे थे तो लाल चाहते थे कि उन्हें चुनने वाली पहली सेलेक्शन कमेटी के जो दो सदस्य (वे और गुंडपा विश्वनाथ) जीवित हैं, बीसीसीआई उन्हें टेस्ट देखने आमंत्रित करे। बीसीसीआई ने ऐसा नहीं किया। लाल तो इस बारे में खुलकर बोले भी कि जब उन्होंने ईडन गार्डन्स टेस्ट का टिकट मांगा तो वह भी बीसीसीआई और क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल ने नहीं दिया। इसे वे कभी नहीं भूले।
उन्होंने खब्बू विनोद कांबली को भी सपोर्ट किया। एक सेलेक्शन मीटिंग के दौरान, कांबली के चयन की चर्चा में चीफ सेलेक्टर नरेन तम्हाने ने कांबली के बैकग्राउंड पर कमेंट किया, 'आकाश, तुम चॉल में रहने वाले को क्यों सपोर्ट कर रहे हो?' लाल का मानना था कि टीम सेलेक्शन, खिलाड़ी के रहने की जगह या बैकग्राउंड के बजाय उसकी क्रिकेटिंग टैलेंट पर होना चाहिए। इसलिए वे तम्हाने के कमेंट पर भड़क गए और बहस में मीटिंग रुक गई। आखिरकार शारजाह के इस टूर के लिए तेंदुलकर के साथ कांबली को भी चुन लिया।
टेस्ट क्रिकेटर अरुण लाल उनके भतीजे हैं। वे 16 टेस्ट और 13 वनडे मैच खेले। जब आकाश लाल सेलेक्टर थे तो अरुण ने घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया- 1989-90 में 118.28 औसत से 828 रन और 1990-91 में 88.66 औसत से 798 रन। बाद में आकाश लाल ने बताया कि इस रिकॉर्ड के बावजूद अरुण भारतीय टीम में वापस न लौट पाए।
उनका परिवार क्रिकेट से जुड़ा था। उनके पिता, धीर मुनि लाल और चाचा धीर जगदीश लाल फर्स्ट-क्लास क्रिकेटर थे, जबकि अरुण लाल बाद में भारत के लिए खेले। लगातार 62 साल तक, परिवार का कम से कम एक सदस्य फर्स्ट-क्लास क्रिकेट से जुड़ा रहा।
इन सभी उपलब्धियों के बावजूद, डीडीसीए के साथ लाल का आखिरी जुड़ाव निराशाजनक रहा। उनके निधन पर एसोसिएशन की तरफ से प्रतिनिधित्व पर भी सवाल उठा। भारत के लिए खेले कीर्ति आजाद ने भी डीडीसीए को लिखा कि लाल और बिशन सिंह बेदी के लिए प्रार्थना सभा आयोजित करें।
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भले ही आकाश लाल का अपना टेस्ट खेलने का सपना अधूरा ही रह गया पर भारतीय क्रिकेट के इतिहास में वे उस वक्त टीम सेलेक्शन रूम में थे जब सही समय पर टैलेंट को सपोर्ट करने की जरूरत थी और 'जोनल कोटे' के दायरे से बाहर निकलकर तेंदुलकर और कांबली को सपोर्ट किया।