Cricket Tales - कहानी एक अजीब टेस्ट हैट्रिक जिसके 3 विकेट न सिर्फ 3 अलग-अलग ओवर में, दो पारी में आए - एक गेंदबाज के लगातार गेंदों पर तीन विकेट- ये हुई हैट्रिक। जब गेंदबाज की लगातार तीन गेंद में विकेट, भले ही इनमें दूरी हो तो इसे कहते हैं 'ब्रोकन हैट्रिक'। इस दूरी के चक्कर में कई बार तो गेंदबाज को भी यह एहसास नहीं होता कि हैट्रिक दर्ज की है। 

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फर्स्ट क्लास क्रिकेट में ऐसी मिसाल हैं जबकि अलग-अलग पारी में, लेकिन लगातार 3 गेंद पर 3 विकेट लिए और हैट्रिक बन गई। एक और बिलकुल अनोखी मिसाल इंटरनेशनल क्रिकेट की है जब हैट्रिक के विकेट, न सिर्फ तीन अलग-अलग ओवर में, दो अलग-अलग पारी में आए। इस अनोखी हैट्रिक को देखने दिसंबर 1988 के ऑस्ट्रेलिया-वेस्टइंडीज पर्थ टेस्ट में जाना होगा।

वेस्टइंडीज ने पहली पारी में 449 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया- कप्तान विव रिचर्ड्स 146 रन (102 रन बाउंड्री शॉट से)। मर्व ह्यूज ने 5 विकेट लिए और वेस्टइंडीज के आखिरी 5 विकेट 28 रन में गिरे जिनमें ह्यूज ने पारी के 122वें ओवर की आखिरी गेंद पर सर कर्टली एम्ब्रोस का विकेट लिया और बाद में 124वें ओवर की पहली गेंद पर पैट्रिक पैटरसन को आउट कर पारी को खत्म किया। जवाब में, ऑस्ट्रेलिया ने तीसरे दिन स्टंप से पहले 395/8 पर, पारी को समाप्त घोषित किया।

अब शुरू हुई वेस्ट इंडीज की दूसरी पारी। ह्यूज के हाथ में नई गेंद और सामने थे ओपनर गॉर्डन ग्रीनिज। पहली ही गेंद पर, ग्रीनिज आउट और तेज गेंदबाज ह्यूज की हैट्रिक बन गई- ऐसी अनोखी हैट्रिक जो तीन अलग-अलग ओवर में फैली हुई थी। ह्यूज ने पारी में 8 विकेट लिए। आख़िरी दिन, सुबह पारी घोषित करने से पहले वेस्टइंडीज ने 349/9 का स्कोर बना लिया था। जीत के 404 रन के लक्ष्य को हासिल करने उतरी ऑस्ट्रेलिया की टीम महज 234 रन पर ढेर हो गई और 169 रन से मैच हार गई।

इस तरह, ह्यूज ने अपने 36वें ओवर की आखिरी गेंद पर कर्टली एम्ब्रोस, अपने 37वें ओवर की पहली गेंद पर पैट्रिक पैटरसन (वेस्टइंडीज की पहली पारी की आखिरी गेंद) और दूसरी पारी की पहली गेंद पर गॉर्डन ग्रीनिज को आउट किया। ये अनोखी हैट्रिक दो पारियों में बंटी थी। आम तौर पर ये गलतफहमी बनी हुई है कि ये टेस्ट क्रिकेट में, ऐसी पहली हैट्रिक थी जो दो पारी में बंटी थी- सच ये है कि विंडीज के तेज गेंदबाज कर्टनी वॉल्श ने दो हफ्ते पहले ही यही रिकॉर्ड बनाया था और टेस्ट इतिहास में ऐसी हैट्रिक बनाने वाले पहले क्रिकेटर बने थे।

फिर भी मर्व की हैट्रिक अनोखी थी क्योंकि यह न सिर्फ दो पारियों में, बल्कि तीन ओवर में बंटी हुई थी। जब वास्तव में हैट्रिक बनी तो उन्हें खुद एकदम ये अहसास नहीं हुआ कि हैट्रिक बना दी है- पिछले विकेट लिए, इतनी देर हो चुकी थी कि उन्हें जोड़ना याद ही नहीं रहा।

लेखक के बारे में

Charanpal Singh Sobti
Charanpal Singh Sobti is a veteran cricket writer with more than five decades of experience covering the game. At Cricketnmore, he brings his extensive knowledge, unique perspective and deep understanding of cricket to readers through insightful news, analysis, historical pieces and fascinating stories from the world of cricket. Read More
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