आईसीसी महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप 2025 महिला इंटरनेशनल क्रिकेट कैलेंडर में एक ख़ास आयोजन है। इस बार भारत में इसे खेलते हुए महत्व और भी ज्यादा क्योंकि इसी के साथ भारत के इंटरनेशनल महिला क्रिकेट के 50 साल के सफर का जश्न भी मना रहे हैं। 

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महिलाओं के लिए क्रिकेट की बात करें तो भारत में शुरुआत 1969 में मुंबई में पहले महिला क्रिकेट क्लब, द एल्बीज बनने के साथ हुई थी। शुरुआत कोई आसान नहीं थी। 1970 के दशक तक हालत ये थी कि भारत में महिला क्रिकेट के उस दौर के सबसे बड़े प्रमोटर, महेंद्र कुमार शर्मा, लखनऊ की सड़कों पर ऑटोरिक्शा में बैठकर, मैच देखने वाली, भीड़ इकट्ठी करने के लिए, ये आवाज लगाते घूमते थे कि आओ स्कर्ट पहन कर क्रिकेट खेल रही लड़कियों को देखो। 

तब बीसीसीआई भारत में महिला क्रिकेट को न तो किसी भी तरह से सपोर्ट करता था और न ही कभी ये सोचा कि वे पुरुष क्रिकेट के साथ-साथ महिला क्रिकेट को भी अपने बैनर में ले लें। आप कहेंगे कि आज तो बीसीसीआई ही महिला क्रिकेट मैच आयोजित करता है। इसका सच ये है कि आखिरकार 2006 में उन्हें मजबूरी में महिला क्रिकेट को अपने बैनर में लेना पड़ा था। असल में हुआ ये कि आईसीसी ने महिला इंटरनेशनल क्रिकेट को अपने बैनर में ले लिया और इसके बाद अपने साथ जुड़े सभी क्रिकेट बोर्ड के लिए ये जरूरी कर दिया कि वे भी महिला क्रिकेट को बढ़ाने में हिस्सेदार बनें और अपने-अपने देश में, महिला क्रिकेट का आयोजन अपने बैनर में करें। इस तरह से बीसीसीआई के पास अब जिम्मेदारी से बचने का कोई रास्ता न था। 

तब भी, शुरुआत में सब कुछ ठीक नहीं था। हनीमून जैसा कोई दौर नहीं आया। भारत में महिला क्रिकेट के लिए आगे बढ़ने का ये भी कोई आसान रास्ता नहीं था। हालात का अंदाजा 2011 में वानखेड़े स्टेडियम में एक प्रोगाम के दौरान हुई एक घटना से बड़ी आसानी से हो जाएगा। उस प्रोगाम के दौरान, भारत की पहली वर्ल्ड कप कप्तान और मशहूर खिलाड़ियों में से एक डायना एडुल्जी ने नए बीसीसीआई प्रेजिडेंट एन श्रीनिवासन को उन के प्रमोशन पर बधाई दी और साथ ही ये उम्मीद जाहिर कर दी कि पूरा विश्वास है कि उनकी देख-रेख में देश में महिला क्रिकेट और आगे बढ़ेगी।

एन श्रीनिवासन ने अपने दो-टूक जवाब से डायना को न सिर्फ हैरान कर दिया, चौंका भी दिया। वे बोले, 'अगर मेरा बस चलता तो मैं तो महिला क्रिकेट को पनपने भी नहीं देता। महिलाओं का क्रिकेट खेलने का कोई मतलब ही नहीं है। हम तो मजबूरी में अब महिला क्रिकेट से इसलिए जुड़ रहे हैं क्योंकि आईसीसी ऐसा आदेश दे दिया है।'

क्या आप जानते हैं कि इसी दो-टूक जवाब से ब्लॉकबस्टर फिल्म 'चक दे इंडिया' के एक मशहूर सीन को शूट करने की प्रेरणा मिली थी? फिल्म में दिखाया कि हॉकी फेडरेशन के अधिकारी भारत की महिला टीम के वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने की बात पर भी हैरान हैं और तब एक सीनियर अधिकारी ने कहा, 'भारत की इन 'चकला-बेलन' चलाने वाली लड़कियों के बस में कहां है शॉर्ट्स पहनकर हॉकी खेलना!'

इस तरह के किस्सों की तुलना में आज नजारा पूरी तरह से बदल चुका है और भारत रिकॉर्ड चौथी बार महिला वर्ल्ड कप की मेजबानी कर रहा है। इस वर्ल्ड कप का फाइनल 2 नवंबर को खेलेंगे और संयोग से भारत ने महिला क्रिकेट का जो पहला टेस्ट मैच खेला वह भी, 49 साल पहले,  2 नवंबर को ही खत्म हुआ था। भारत इस टेस्ट से हुई शुरुआत का ही जश्न मना रहा है। यह टेस्ट मैच 31 अक्टूबर, 1976 से बेंगलुरु में वेस्टइंडीज के विरुद्ध खेला था और ड्रॉ रहा। यकीन मानिए, वेस्टइंडीज़ टीम ने उस टूर पर 6 टेस्ट मैच की सीरीज़ खेली थी। शांता रंगास्वामी भारत की पहली कप्तान थीं और पहले टेस्ट में उन्होंने 74 का टॉप स्कोर बनाया। इसी सीरीज़ में भारत ने अपना पहला टेस्ट (पटना में) जीता और पहला टेस्ट (जम्मू में) हारे भी।

अन्य ख़ास माइलस्टोन:

* पहला वनडे इंटरनेशनल मैच 1 जनवरी 1978 को वर्ल्ड कप के दौरान खेला और ये भारत में ही था, इंग्लैंड के विरुद्ध ईडन गार्डन्स में और 9 विकेट से हार गए। 

* पहली वनडे जीत 1982 वर्ल्ड कप में, 17 जनवरी 1982 को न्यूज़ीलैंड में, इंटरनेशनल इलेवन के विरुद्ध मिली थी।

* 2005: अपना पहला वर्ल्ड कप फाइनल खेला (ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध और हार)।

* 2017: अपना दूसरा वर्ल्ड कप फाइनल खेला (लॉर्ड्स में इंग्लैंड के विरुद्ध और हार)।

दोनों बार मिताली राज कप्तान थीं।

* पहला टी20 इंटरनेशनल मैच 5 अगस्त 2006 को इंग्लैंड के डर्बी में इंग्लैंड के विरुद्ध खेले और 8 विकेट से जीत गए।

* टी20 वर्ल्ड कप: 2020 में फाइनल खेला।

* एशिया कप चैंपियन (7): 2004, 2005-06, 2006, 2008, 2012, 2016, 2022

* कॉमनवेल्थ गेम्स: 2022 में सिल्वर मेडल 

* एशियन गेम्स: 2022 में गोल्ड मेडल 

* इंटरनेशनल क्रिकेट रिकॉर्ड:

टेस्ट: 41 टेस्ट, 8 जीत, 6 हार, 27 ड्रॉ, 19.51 जीत प्रतिशत

वनडे: 333 मैच, 183 जीत, 144 हार, 2 टाई, 4 नो रिजल्ट, 54.95 जीत प्रतिशत

टी20 इंटरनेशनल: 204 मैच, 111 जीत, 86 हार, 1 टाई, 6 नो रिजल्ट, 54.90 जीत प्रतिशत

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चरनपाल सिंह सोबती

लेखक के बारे में

Charanpal Singh Sobti
Charanpal Singh Sobti is a veteran cricket writer with more than five decades of experience covering the game. At Cricketnmore, he brings his extensive knowledge, unique perspective and deep understanding of cricket to readers through insightful news, analysis, historical pieces and fascinating stories from the world of cricket. Read More
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