लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) के लिए, आईपीएल 2026 सीजन, ऋषभ पंत (Rishabh Pant) की कप्तानी के तौर पर वापसी का सीजन मान रहे हैं। आईपीएल की सबसे महंगी फ़्रैंचाइज़ी को आईपीएल में बड़ी कामयाबी का इंतजार है: पहले दो सीजन में प्ले-ऑफ में हार गए और पिछले दो सीजन में नंबर 7 रहे।
ज़ाहिर है, नए सीजन में, फोकस ख़ास तौर पर मौजूदा कप्तान पंत पर है, उनकी कप्तानी के साथ-साथ बल्लेबाज़ी पर भी। पिछला सीज़न भले ही गुजरात टाइटन्स के विरुद्ध 61 गेंद में 118* बनाकर ख़त्म किया पर उससे पहले तो 13 मैच में सिर्फ़ 151 रन ही बनाए थे। इस रिकॉर्ड के लिए फ़्रैंचाइज़ी ने उन्हें 27 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड कीमत पर साइन नहीं किया था। अब पंत को आईपीएल के सबसे महंगे खिलाड़ी होने के टैग को सही साबित करना होगा।
इसलिए जानकार आईपीएल 2026 को उनके लिए ‘करो या मरो’ वाला सीज़न मान रहे हैं इस उम्मीद से कि पिछले सीजन के 14 पारी में 269 रन से कहीं बेहतर प्रदर्शन करेंगे। साथ ही उनके पास एक कप्तान के तौर पर भी अपना रिकॉर्ड सुधारने का मौका है। अब तक, दो अलग-अलग टीम की कप्तानी में 50 से ज़्यादा मैच के बावजूद आईपीएल टाइटल नहीं जीता है। उनका कुल कप्तानी रिकॉर्ड: 57 मैच (30 जीत + 27 हार)।
दिल्ली कैपिटल्स (2021–2024) के साथ, उन्हें एक ‘हार न मानने वाले’ कप्तान का टैग तो मिला और 43 मैच में टीम की कप्तानी की पर बिना टाइटल। इसके बाद, केएल राहुल से निराश, LSG ने 2025 सीज़न से पहले ऋषभ पंत को कप्तान बनाने के लिए ऑक्शन में उन पर रिकॉर्ड तोड़ 27 करोड़ रुपये खर्च कर दिए पर टीम की कामयाबी की स्टोरी ज्यों की त्यों ही रह गई।
वे आईपीएल टाइटल जीतने के मामले में, बहुत संभव है कि कभी रोहित शर्मा और एमएस धोनी जैसे भाग्यशाली साबित न हों, लेकिन कम से कम उन कप्तान की लिस्ट से तो बाहर आ ही सकते हैं जो 50 से ज़्यादा आईपीएल मैच में कप्तानी रहे लेकिन कोई टाइटल न जीता।
विराट कोहली (143 मैचों में 68 जीत, 71 हार, 3 टाई और 1 मैच में कोई स्पष्ट नतीजा नहीं) इस लिस्ट में टॉप पर हैं। वे कप्तान के रोल में (2013 से 2021 तक और फिर 2023 में कुछ मैच में) अपनी शानदार बैटिंग फॉर्म को आईपीएल टाइटल में न बदल पाए। उनका मामला और भी अनोखा इसलिए है क्योंकि वे सिर्फ़ एक फ़्रैंचाइज़ी, रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर, के कप्तान रहे और अकेले ऐसे कप्तान हैं जो 100 से ज़्यादा मैचों में कप्तानी के बावजूद कोई टाइटल नहीं जीत पाए।
विराट अभी भी खेल रहे हैं, लेकिन कप्तान नहीं हैं। इसी तरह, संजू सैमसन (67 मैच में 33 जीत, 33 हार और 1 बेनतीजा मैच) के पास भी कप्तान के तौर पर अपने रिकॉर्ड में आईपीएल टाइटल जोड़ने का मौका नहीं है। 2021 से 2025 तक राजस्थान रॉयल्स के कप्तान रहे, कप्तान के तौर पर अपने पहले ही मैच में 100 बनाया (ऐसा करने वाले पहले आईपीएल कप्तान) और विराट की तरह ही ढेरों रन बनाए, लेकिन टाइटल न जीत पाए। अब वह रॉयल्स से अलग हो चुके हैं।
अभाग्यशाली के मामले में, केएल राहुल का नंबर अगला है। 64 मैच में कप्तान (32 जीत, 32 हार) लेकिन आईपीएल टाइटल नहीं जीत पाए। उन कप्तान में जो एक से ज़्यादा टीम के कप्तान रहे, वह सबसे अभाग्यशाली हैं। 2022 सीज़न से पहले, लखनऊ सुपर जायंट्स ने उन्हें 17 करोड़ रुपये में खरीदा तो इस उम्मीद से कि लंबे समय तक कप्तान रहेंगे लेकिन 37 मैच के बाद उन पर से भरोसा उठ गया। ऐसा लगता है कि लखनऊ वालों ने इस रिकॉर्ड पर ध्यान नहीं दिया कि उससे पहले के 27 मैच में वह किंग्स XI पंजाब के लिए भी टाइटल नहीं जीत पाए थे। अब वह कप्तान नहीं हैं और इस रोल में उनका रिकॉर्ड फिलहाल यहीं रुका हुआ है। ऋषभ पंत की स्टोरी काफी हद तक उनसे मिलती-जुलती है।
आईपीएल की शुरुआत में वीरेंद्र सहवाग एक बड़े खिलाड़ी थे। आइकन खिलाड़ी थे और दिल्ली डेयरडेविल्स के पहले कप्तान बने (2008 से 2012 तक)। उनके साथ टीम लगातार दो सीज़न (2008 और 2009) में सेमी-फ़ाइनल खेली और 2009 में तो लीग टेबल में टॉप पर थे लेकिन 52 मैच में कप्तानी के बावजूद वह टीम को कोई भी टाइटल नहीं दिला पाए। पंजाब टीम के भी कप्तान रहे एक मैच में। वह उन गिने-चुने कप्तान में से एक हैं, जो एक ही फ़्रैंचाइज़ी के 50 से ज़्यादा मैच में कप्तान रहे लेकिन कभी कोई टाइटल नहीं जीत पाए। आईपीएल में उनकी कप्तानी का कुल रिकॉर्ड: 53 मैच (29 जीत, 24 हार)।
हैरानी की बात तो ये कि आईपीएल के किसी भी शुरू के आइकन को कप्तान के तौर पर सफलता नहीं मिली। सहवाग की तरह, सचिन तेंदुलकर भी कप्तान के तौर पर कामयाबी का स्वाद नहीं ले पाए। आईपीएल के पहले ही सीज़न से मुंबई इंडियंस के कप्तान थे और 51 मैच में कप्तानी की (30 जीत, 21 हार) लेकिन उनके हाथ कोई भी टाइटल नहीं लगा। उनके नाम एक अनोखा रिकॉर्ड ये कि एक ही टीम के लिए 50 मैच में कप्तान लेकिन कोई भी टाइटल नहीं जीत पाए।
इसी तरह, रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने राहुल द्रविड़ (14 मैच) के साथ शुरुआत की थी। इसके बाद वे 2012 और 2013 के बीच राजस्थान रॉयल्स की कप्तानी संभाली शेन वॉर्न से। 34 मैचों में इस टीम की कप्तानी की लेकिन इस टीम को भी कोई टाइटल नहीं दिला पाए।
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चरनपाल सिंह सोबती