17 जुलाई को सर गारफील्ड सोबर्स (Sir Garfield Sobers) का निधन हुआ अपने 90वें जन्मदिन से सिर्फ 11 दिन पहले। 29 जुलाई को बारबाडोस में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया। बारबाडोस में उस दिन राष्ट्रीय शोक था ताकि देश अपने सबसे महान सपूत में से एक को आख़िरी विदाई दे सके।

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उनके अंतिम संस्कार का आयोजन उसी केंसिंग्टन ओवल स्टेडियम में हुआ जहां पवेलियन उनके नाम का है। पूरे बारबाडोस में राष्ट्रीय ध्वज झुके रहे। अंतिम संस्कार से दो दिन पहले उनके पार्थिव शरीर को लोगों के अंतिम दर्शन एक-एक दिन संसद भवन और फिर केंसिंग्टन ओवल में रखा, जहां हजारों लोगों ने अपने महान क्रिकेट नायक को श्रद्धांजलि दी।

करीब 2.80 लाख की आबादी है इस छोटे से द्वीपीय देश बारबाडोस की पर यहां अपने खिलाड़ियों और कलाकारों के योगदान को बड़ा सम्मान देते हैं। सोबर्स के अंतिम संस्कार के लिए स्टेडियम में एंट्री टिकट से थी, जो मुफ्त दिए। उनका ताबूत बारबाडोस के राष्ट्रीय ध्वज से लिपटा था। जब संसद भवन से तोपगाड़ी (गन कैरिज) पर उनकी आख़िरी यात्रा शुरू हुई तो सड़कों पर हजारों लोगों ने किनारे खड़े होकर अपने हीरो को विदा किया। केंसिंग्टन ओवल में क्रिकेटरों ने बैट ऊपर उठा, गार्ड ऑफ ऑनर दिया। बाद में उन्हें कोरल रिज मेमोरियल गार्डन्स में दफना दिया।

अंतिम संस्कार में शामिल होने वालों में बारबाडोस के प्रेसिडेंट जेफरी बॉस्टिक, पीएम मिया मोटली, सर क्लाइव लॉयड, डेसमंड हेन्स, ब्रायन लारा और ग्लोबल म्यूजिक स्टार रिहाना सहित और भी कई थे। एक और खास बात- वेस्टइंडीज टीम ने ट्रौबा में पाकिस्तान के विरुद्ध टेस्ट मैच चार दिनों में जीत लिया, ताकि खिलाड़ी और अधिकारी इस अंतिम संस्कार में शामिल हो सकें।

इस विदाई समारोह की एक सबसे खास बात थी इसे दुनिया के कई देशों से जोड़ना, और वहां लाइव स्ट्रीमिंग की गई। एक नया इतिहास बनाते हुए, बारबाडोस हाई कमीशन ने लॉर्ड्स के ऐतिहासिक 'लॉन्ग रूम' में भी प्रोग्राम की स्ट्रीमिंग का इंतजाम किया और इसे लाइव दिखाया। वहां इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइक गैटिंग और एमसीसी के कई सदस्य इसमें शामिल थे। 1992 में लॉर्ड्स में राफेल ने सोबर्स के जिस मशहूर पोर्ट्रेट को बनाया था, उसे ही 'लॉन्ग रूम' के उस दरवाजे के सामने रखा था, जहां से सोबर्स न जाने कितनी बार अपने बेहतरीन प्रदर्शन के लिए ग्राउंड में गए। ये उस क्रिकेटर के लिए लॉर्ड्स में एक भावुक श्रद्धांजलि थी, जिसने लॉर्ड्स में खेले 5 टेस्ट में 95 के औसत से रन बनाए।

क्रिकेट के महान दिग्गजों के अंतिम संस्कार पर नजर डालें तो ये समझना कोई मुश्किल नहीं कि इन दिग्गजों ने अपने रिकॉर्ड से परे आम जनमानस को कितनी गहराई से प्रभावित किया। इनमें देश का गौरव, मिलिट्री सम्मान, धार्मिक परंपराएं और लोगों का प्यार साफ़ झलकता है। ऐसी ही क्रिकेट इतिहास की कुछ सबसे यादगार विदाई:

आखिरी पारी: क्रिकेट के महान खिलाड़ियों की वे अंतिम यात्राएं जिन्हें दुनिया कभी नहीं भूलेगी (Cricket's Greatest Farewells)

सर डोनाल्ड ब्रैडमैन (Sir Donald Bradman) 2001

एडिलेड में ब्रैडमैन के अंतिम संस्कार में ऑस्ट्रेलिया के राजनीतिक नेताओं, क्रिकेट के दिग्गजों और देश भर के खेल जगत की मशहूर हस्तियों ने हिस्सा लिया। हालांकि ये एक प्राइवेट प्रोग्राम था, लेकिन जब उनकी शव यात्रा गुजरी तो सड़कों पर हजारों प्रशंसक मौजूद थे। पूर्व प्रधानमंत्री जॉन हॉवर्ड ने ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े खेल आइकन के सम्मान में एक भावुक श्रद्धांजलि भाषण दिया।

शेन वॉर्न (Shane Warne) 2022

आधुनिक क्रिकेट में शायद सबसे भावुक विदाई वॉर्न को मिली। मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में सार्वजनिक श्रद्धांजलि सभा में 50 हजार से ज्यादा लोग मौजूद थे। उनके ताबूत पर उनकी प्रिय 'बैगी ग्रीन' कैप रखी थी। एल्टन जॉन ने वीडियो लिंक के जरिए संगीत से विदाई दी, जबकि ब्रायन लारा, सचिन तेंदुलकर, एलन बॉर्डर, नासिर हुसैन और कई अन्य क्रिकेट दिग्गजों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

फिलिप ह्यूज (Philip Hughes) 2014

फिलिप ह्यूज की मौत ने क्रिकेट जगत को झकझोर दिया था। एक शेफील्ड शील्ड मैच के दौरान बाउंसर लगने से उनकी मौत हो गई थी। उनके अंतिम संस्कार के समय गहरा शोक छाया हुआ था। उनके ताबूत पर उनकी टेस्ट कैप रखी थी और उनके ऑस्ट्रेलियाई साथी खिलाड़ियों ने उन्हें कंधा दिया था। माइकल क्लार्क की भावुक श्रद्धांजलि किसी खिलाड़ी द्वारा दिए गए अब तक के सबसे यादगार भाषण में से एक मानी जाती है।

मंसूर अली खान पटौदी (Mansoor Ali Khan Pataudi) 2011

टाइगर पटौदी के अंतिम संस्कार में उनकी जिंदगी की अलग-अलग भूमिका की झलक मिली- एक पूर्व नवाब, भारतीय क्रिकेट कप्तान और फिल्म जगत की दिग्गज हस्ती शर्मिला टैगोर के पति। उन्हें अंतिम सम्मान देने के लिए पटौदी पैलेस में हजारों लोग जमा हुए। उन्हें पैलेस कॉम्प्लेक्स में ही पारिवारिक कब्रिस्तान में उनके पिता, इफ्तिखार अली खान पटौदी के बगल में दफनाया गया।

कॉलिन काउड्रे (Colin Cowdrey) 2001

लॉर्ड कॉलिन काउड्रे की श्रद्धांजलि सभा वेस्टमिंस्टर एबे में आयोजित हुई जो एक बड़ा दुर्लभ सम्मान है। आमतौर पर शाही परिवार के लोगों और ब्रिटेन की सबसे प्रतिष्ठित हस्तियों के लिए ही यहां ऐसा आयोजन होता है। काउड्रे का सम्मान न सिर्फ उनके क्रिकेट के लिए, उनकी खेल-भावना, विनम्रता और क्रिकेट के बेहतरीन एंबेसडर (दूत) के तौर पर उनकी भूमिका के लिए भी किया जाता था।

सर फ्रैंक वॉरेल (Frank Worrell) 1967

क्रिकेट इतिहास में शायद ही किसी विदाई का असर सर फ्रैंक वॉरेल के अंतिम संस्कार जैसा भावुक रहा हो। जब 42 साल की उम्र में ल्यूकेमिया से उनकी मौत हुई, तो पूरे कैरिबियन में शोक छा गया। वेस्टइंडीज के पहले ऐसे क्रिकेटर बने जिन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई और ऐसे पहले खिलाड़ी जिनके सम्मान में लंदन में वेस्टमिंस्टर एबे में श्रद्धांजलि सभा आयोजित हुई।

जब बारबाडोस में उनकी अंतिम यात्रा निकली, तो हज़ारों लोग सड़कों पर जमा थे और उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए स्कूल, दफ़्तर और दुकानें बंद रहीं। सबसे यादगार नजारा तो ये था कि जब वेस्टइंडीज के झंडे में लिपटे वॉरेल के ताबूत के पीछे उनके पुराने साथी खिलाड़ी चल रहे थे तो लोगों ने शोक के प्रतीक के तौर पर खामोश रहने के बजाय तालियां बजाईं। यह उस व्यक्ति के लिए जश्न था जिसकी लीडरशिप ने वेस्टइंडीज क्रिकेट की कायापलट कर दी और खेल के जरिए कैरिबियन को एकजुट किया।

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आम तौर पर क्रिकेट में हीरो अपने रिकॉर्ड और ट्रॉफी के जरिए याद किए जाते हैं लेकिन उनकी अंतिम यात्रा अक्सर उनसे भी बड़ी विरासत को सामने लाती हैं। सर गारफील्ड सोबर्स, फ्रैंक वॉरेल, ब्रैडमैन, वॉर्न और अन्य लोगों को दी गई असाधारण विदाई ये याद दिलाती है कि खेल की इन महान हस्तियों को उनके रिकॉर्ड से कहीं ऊपर देखें। वे राष्ट्रीय गौरव, एकता और प्रेरणा के प्रतीक बन जाते हैं और उनका ये प्रभाव बहुत बाद में भी याद रहता है।

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Charanpal Singh Sobti
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