India vs England T20 World Cup 2026 Semi Final: भारत की टीम वेस्टइंडीज पर जीत के साथ इंग्लैंड के विरुद्ध टी20 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल खेल रही है। क्या आप जानते हैं:
* ये टी20 वर्ल्ड कप में लगातार तीसरा भारत-इंग्लैंड सेमीफाइनल है।
* भारत और इंग्लैंड इससे पहले भी एक बार वानखेड़े स्टेडियम में वर्ल्ड कप सेमीफाइनल खेल चुके हैं: 1987 में रिलायंस वर्ल्ड कप में। तब भारत डिफेंडिंग चैंपियन था और साथ में मेजबान भी। जीत इंग्लैंड को मिली थी। इस बार भी भारत डिफेंडिंग चैंपियन होने के साथ-साथ मेजबान भी है। तो क्या हिसाब बराबर होगा?
इसीलिए 5 मार्च 2026 को वानखेड़े में होने वाले इन दोनों टीमों के बीच सेमीफाइनल ने, 1987 के उस दिल टूटने वाले सेमीफाइनल की याद ताजा कर दी हैं। इत्तेफाक ये कि वह सेमीफाइनल भी 5 तारीख (नवंबर) को खेला था।
1987 के रिलायंस वर्ल्ड कप के दोनों संयुक्त मेजबान भारत और पाकिस्तान, पूल A और पूल B में टॉप पर थे और हर किसी ने कहा कि फाइनल इन्हीं दोनों टीम के बीच होगा। बड़ा शोर था पर हुआ ये कि दोनों टीम जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वास की शिकार हुईं: सेमीफाइनल में पाकिस्तान हार गया ऑस्ट्रेलिया से जबकि भारत हार गया इंग्लैंड से। इस तरह न तो भारत और न ही पाकिस्तान 8 नवंबर के ईडन गार्डन्स फाइनल में पहुंच पाए।
उस सेमीफाइनल में जब इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 254-6 रन बनाए, तब भी कपिल देव की टीम ज्यादा चिंतित नहीं थी। ग्राहम गूच (136 गेंद, 11 चौकों के साथ 115) ने बड़ी खूबी से स्वीप शॉट खेलते हुए भारत के स्पिनर्स, मनिंदर सिंह और रवि शास्त्री को बेअसर कर दिया। माइक गैटिंग (62 गेंद, 5 चौकों के साथ 56) भी उनके साथ इस स्कीम में शामिल थे और अपना रोल बखूबी निभाया।
चेज करते हुए, हालांकि कुछ विकेट जल्दी गिरे, तब भी मैच भारत के कंट्रोल में था और एक समय लगभग पांच रन प्रति ओवर के हिसाब से स्कोर की जरूरत थी। जब 17 ओवर में 87 रन चाहिए थे तो 6 विकेट बचे थे और कपिल देव और मोहम्मद अजहरुद्दीन (74 गेंद, 7 चौकों की मदद से 64) क्रीज पर थे। तभी, जोश में कपिल (22 गेंद पर 30) ने हेमिंग्स की गेंद पर 6 के लिए एक ऊंचा शॉट लगा दिया। गेंद बाउंड्री से कुछ गज अंदर रह गई और गैटिंग ने कैच लपक लिया। इसके बाद तो विकेट गिरने की झड़ी लग गई।
आखिर में भारत 35 रन से हार गया। आम तौर पर, वानखेड़े में मिली इस हार के लिए गूच के स्वीप शॉट और कपिल के उस एक स्ट्रोक को जिम्मेदार ठहराया गया। ये सुनील गावस्कर का आखिरी मैच बन गया। इस हार से ड्रेसिंग रूम में निराशा का माहौल था। वानखेड़े स्टेडियम में इंग्लैंड से मिली ये हार बड़े टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में, खास तौर पर वानखेड़े में, भारत के लिए एक ऐसा अभिशाप बन गई जो कई साल चला। यहां वेस्टइंडीज से दो साल बाद नेहरू कप और 2016 वर्ल्ड टी20 में सेमीफाइनल में हार गए। भारत तीन वनडे वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में भी हारा: 1996, 2015 और 2019 में।
इस सब के अतिरिक्त, उस सेमीफाइनल में भारत की हार की एक और वजह भी थी। कई जानकार तो मानते हैं कि भारत मैच शुरू होने से पहले ही, पहला राउंड हार गया था। हुआ ये कि दुनिया के टॉप रैंक बल्लेबाज में से एक और टीम के उपकप्तान दिलीप वेंगसरकर, मैच से पहले फूड पॉइजनिंग का शिकार हो गए, और उस बड़े मैच की सुबह टीम से बाहर होना पड़ा।
वेंगसरकर कहते हैं, ‘रात 2.30 बजे, डिनर में पोर्क रिब्स खाने के बाद, मुझे फूड पॉइजनिंग का जबरदस्त अटैक आया। उल्टियां हो रही थीं और मैं खुद को बड़ा बीमार महसूस कर रहा था। इस वजह से टीम से बाहर होना, दिल तोड़ने वाला था क्योंकि मैं तब बड़े अच्छे फ़ॉर्म में था और हम एक टीम के तौर पर बड़ा अच्छा खेल रहे थे।’ चंद्रकांत पंडित, जो कतई उन जैसे बल्लेबाज नहीं थे, उनकी जगह टीम में आ गए।
एक बड़े मैच से ठीक पहले वेंगसरकर के साथ हुआ फ़ूड पॉइजनिंग का ये किस्सा, भारतीय क्रिकेट के सबसे विवादित ‘फ़िटनेस इशू’ में से एक है। हुआ क्या था?
उस सेमीफाइनल से एक दिन पहले, दिलीप और उनकी पत्नी मनाली डिनर के लिए ताज में गोल्डन ड्रैगन गए थे। वहां 'स्पेयर रिब्स' खाईं और शायद उसी से फूड पॉइजनिंग हुई थी। उन्हें लगातार उल्टी हो रही थी, जबकि उनकी पत्नी की हालत तो इतनी खराब थी कि उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती कराना पड़ा।
मीडिया ने इस बारे में अलग-अलग तरह से लिखा। वेंगसरकर ने हमेशा कहा है कि रिब्स खाने से ये गड़बड़ हुई, जबकि मसाला लगाते हुए मुंबई मीडिया के एक हिस्से ने दावा किया कि ये गड़बड़ बांगड़ा (मैकेरल) की वजह से हुई। ये किस्सा यहीं खत्म नहीं होता।
दिलीप का खुद को उस सेमीफाइनल के लिए अनफिट बताना कुछ ऐसा था मानो किसी ने कप्तान कपिल देव पर बीमर फेंक दी हो। उन्होंने खुद भी दिलीप से अनुरोध किया कि वे खेलें लेकिन दिलीप अड़े रहे कि उन्हें 'फ्लू' हो गया है, पैरों में बड़ी कमजोरी महसूस कर रहे हैं और इसलिए वर्ल्ड कप सेमीफ़ाइनल के मुश्किल मुकाबले में नहीं खेल पाएंगे। टीम, दुनिया के टॉप 5 बल्लेबाज में से एक और अच्छी फॉर्म में खेल रहे खिलाड़ी (1987 वर्ल्ड कप में उनके स्कोर थे: विरुद्ध ऑस्ट्रेलिया 29, विरुद्ध न्यूजीलैंड 0, विरुद्ध ज़िम्बाब्वे 46*, विरुद्ध ऑस्ट्रेलिया 63 और विरुद्ध ज़िम्बाब्वे 33*) को खोने से एकदम परेशानी में आ गई।
तब से, दिलीप से कई बार ये सवाल किया गया है कि वर्ल्ड कप के इतने बड़े मैच में वे क्यों नहीं खेले? टीम तो यहां तक तैयार थी, वे अधूरी फिटनेस के साथ भी खेल लें। प्रेस में तो तब ये भी लिखा गया, 'हैरान होने के लिए तैयार हो जाइए।' अटकल ये थी कि 'द कर्नल' ने कपिल से तब 'बदला' लिया जब कपिल इसके लिए कतई तैयार नहीं थे और उन्हें 'स्टंप' कर दिया। दिलीप यह नहीं भूले थे कि इन्हीं कपिल ने उन्हें 22 जून 1983 को ओल्ड ट्रैफर्ड में इंग्लैंड के विरुद्ध सेमीफाइनल के लिए भारत की प्लेइंग इलेवन से बाहर कर दिया था। दिलीप को आज भी इस बात की निराशा है कि वह उस ऐतिहासिक वर्ल्ड कप 1983 जीत में दोनों नॉकआउट मैच में प्लेइंग इलेवन का हिस्सा नहीं थे।
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चरनपाल सिंह सोबती