एशियन पैरा गेम्स 2026 में मंगलवार को जेहान दोराब मदान ने पैरा टेबल टेनिस पुरुष सिंगल्स क्लास 1 में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।
मदान को सेमीफाइनल किम ह्योनुक के हाथों 3-0 (11-4, 11-7, 11-3) से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने पुरुष सिंगल्स क्लास 1 में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। इस मेडल से इन खेलों में भारत के पदकों की संख्या और बढ़ गई है, जो महाद्वीपीय स्तर पर भारतीय पैरा टेबल टेनिस की मजबूती को दर्शाता है।
पूर्व रेसिंग ड्राइवर रहे मदान ने अब तक आईटीटीएफ टूर्नामेंटों में कुल 13 मेडल जीते हैं, जिनमें एक गोल्ड, चार सिल्वर और आठ ब्रॉन्ज शामिल हैं। 2025-26 के दौरान उन्होंने पांच सिंगल्स और चार डबल्स को मिलाकर कुल 9 मेडल जीते। मदान ने एक ऐसी दुर्घटना के बाद भी अपने खेल के सफर को खत्म नहीं होने दिया, जिसने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी थी। 'जेडी मदान' के नाम से मशहूर, वह भारत के प्रमुख क्लास 1 पैरा टेबल टेनिस खिलाड़ियों में से एक बनकर उभरे हैं।
खेल बचपन से ही जेहान की जिंदगी का हिस्सा रहे हैं। चेन्नई के रहने वाले जेहान ने छह साल की उम्र में ही टेनिस रैकेट थाम लिया था और लगभग हर दिन खेलते थे। बाद में वे एक हॉबी रेसर बन गए, चेन्नई के आसपास के सर्किट पर सिंगल-सीटर ओपन-व्हील रेसिंग कारों में हिस्सा लिया और कई बार पोडियम (विजेता मंच) तक पहुंचे।
2007 में, मुंबई की एक बिजनेस ट्रिप के दौरान, एक सड़क दुर्घटना में उनका शरीर छाती के नीचे से पैरालाइज्ड (लकवाग्रस्त) हो गया। हालांकि, प्रतिस्पर्धा करने की उनकी चाहत कभी कम नहीं हुई। 2021 में उन्होंने पैरा टेबल टेनिस खेलना शुरू किया। उन्होंने पैरालंपिक मैचों के वीडियो देखे और खुद को यकीन दिलाया कि वह भी वही कर सकते हैं जो बाकी खिलाड़ी कर रहे हैं।
खेल बचपन से ही जेहान की जिंदगी का हिस्सा रहे हैं। चेन्नई के रहने वाले जेहान ने छह साल की उम्र में ही टेनिस रैकेट थाम लिया था और लगभग हर दिन खेलते थे। बाद में वे एक हॉबी रेसर बन गए, चेन्नई के आसपास के सर्किट पर सिंगल-सीटर ओपन-व्हील रेसिंग कारों में हिस्सा लिया और कई बार पोडियम (विजेता मंच) तक पहुंचे।
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Article Source: IANS