भारतीय एथलेटिक्स में पिछले कुछ वर्षों के दौरान जिस तरह से 400 मीटर दौड़ में नई क्रांति देखने को मिली है, उसमें विशाल थेन्नारासु कयालविझी (विशाल टीके) का नाम अहम है। महज 22 वर्ष की उम्र में उन्होंने वह उपलब्धि हासिल कर ली है, जिसे लंबे समय तक भारतीय एथलेटिक्स का सबसे बड़ा सपना माना जाता था।

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400 मीटर दौड़ को 45 सेकंड से कम समय में पूरा करने वाले पहले भारतीय पुरुष बनने के बाद विशाल टीके की नजर ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतकर अपने ऐतिहासिक सीजन को और यादगार बनाने पर है।

इस वर्ष विशाल ने भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में नया अध्याय लिखा। उन्होंने 44.98 सेकंड का समय निकालते हुए न केवल 45 सेकंड की बाधा को तोड़ा, बल्कि नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष मानी जा रही है क्योंकि भारतीय पुरुष 400 मीटर स्पर्धा लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संघर्ष करते रहे हैं।

चार बार के राष्ट्रीय चैंपियन विशाल ने अपनी सफलता को किसी एक प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने पूरे सीजन में शानदार प्रदर्शन करते हुए खुद को एशिया के शीर्ष क्वार्टर-माइलर्स में शामिल कराया। उनकी निरंतरता और तेज रफ्तार ने उन्हें विश्व रैंकिंग में भी शीर्ष 60 धावकों के बीच जगह दिलाई।

महाद्वीपीय स्तर पर भी विशाल का प्रदर्शन शानदार रहा। एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने भारत की रिले टीमों की सफलता में अहम भूमिका निभाई। भारतीय टीम ने मिक्स्ड 4x400 मीटर रिले में स्वर्ण पदक और पुरुषों की 4x400 मीटर रिले में रजत पदक जीता। इन सफलताओं ने न केवल उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया बल्कि यह भी दिखाया कि वे व्यक्तिगत स्पर्धा के साथ-साथ टीम इवेंट्स में भी भारत के लिए महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं।

अब कॉमनवेल्थ गेम्स उनके सामने अगली बड़ी चुनौती के रूप में है। विशाल का कहना है कि वह सिर्फ भाग लेने नहीं, बल्कि जीतने की मानसिकता के साथ ग्लासगो जा रहे हैं। उनके अनुसार, महीनों की कठिन मेहनत, अनुशासन, निरंतरता और स्वयं पर विश्वास ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है। वह अपने कोच जेसन डॉसन पर पूरा भरोसा जताते हुए कहते हैं कि उनकी तैयारी का उद्देश्य केवल बेहतर समय निकालना नहीं, बल्कि बड़े मंच पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है।

विशाल मानते हैं कि किसी भी खिलाड़ी की सफलता केवल व्यक्तिगत प्रयासों का परिणाम नहीं होती। उन्होंने अपनी उपलब्धियों का बड़ा श्रेय इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट (आईआईएस) को दिया है। उनके अनुसार, विश्व स्तरीय कोचिंग, स्पोर्ट्स साइंस, पोषण, रिकवरी और मानसिक तैयारी जैसी सुविधाओं ने उन्हें एक बेहतर एथलीट बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका कहना है कि मजबूत सपोर्ट सिस्टम होने के कारण वह पूरी तरह अपने प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित कर पाते हैं।

भारतीय पुरुष 400 मीटर स्पर्धा में हाल के वर्षों में जो बदलाव आया है, उसे विशाल एक नई पीढ़ी की शुरुआत मानते हैं। उनका विश्वास है कि भारतीय एथलीट अब दुनिया के किसी भी धावक से मुकाबला कर सकते हैं। राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम करने के बाद भी उनका लक्ष्य केवल व्यक्तिगत उपलब्धियां हासिल करना नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए नए मानक स्थापित करना है। उनका मानना है कि यदि उनकी सफलता किसी युवा खिलाड़ी को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस देती है, तो वही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।

विशाल अपनी तैयारी में निरंतरता को सबसे महत्वपूर्ण मानते हैं। उनका कहना है कि पिछले कुछ महीनों में उन्होंने शारीरिक फिटनेस के साथ मानसिक मजबूती और तकनीकी सुधार पर भी बराबर काम किया है। हर प्रशिक्षण सत्र का उद्देश्य उन्हें पहले से अधिक तेज, मजबूत और दबाव झेलने के लिए तैयार बनाना रहा। उनके अनुसार, उन्होंने सीखा है कि बड़े मुकाबलों में शांत रहना, अपनी तैयारी पर भरोसा करना और सही समय पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना ही सफलता की कुंजी है।

भारतीय पुरुष 400 मीटर स्पर्धा में हाल के वर्षों में जो बदलाव आया है, उसे विशाल एक नई पीढ़ी की शुरुआत मानते हैं। उनका विश्वास है कि भारतीय एथलीट अब दुनिया के किसी भी धावक से मुकाबला कर सकते हैं। राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम करने के बाद भी उनका लक्ष्य केवल व्यक्तिगत उपलब्धियां हासिल करना नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए नए मानक स्थापित करना है। उनका मानना है कि यदि उनकी सफलता किसी युवा खिलाड़ी को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस देती है, तो वही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।

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राष्ट्रीय रिकॉर्ड, चार राष्ट्रीय खिताब, एशियाई स्तर पर पदक और अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल करने के बाद अब विशाल टीके के सामने कॉमनवेल्थ गेम्स में इतिहास रचने का अवसर है।

Article Source: IANS

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