भारत के सबसे प्रतिष्ठित और दुनिया के तीसरे सबसे पुराने फुटबॉल टूर्नामेंट डूरंड कप के 135वें संस्करण की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में शनिवार को मेघालय की राजधानी शिलांग में ट्रॉफी टूर का भव्य स्वागत किया गया। मेघालय सरकार के खेल एवं युवा मामलों के मंत्री वैलादमिकी शायला ने समारोह में तीनों प्रतिष्ठित ट्रॉफियों का स्वागत करते हुए राज्य में ट्रॉफी यात्रा को औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाई। इसके साथ ही 135वें इंडियन ऑयल डूरंड कप से पहले मेघालय में सार्वजनिक कार्यक्रमों और फुटबॉल उत्सव की शुरुआत हो गई।

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इस महीने की शुरुआत में नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने डूरंड कप की तीनों ट्रॉफियों—डूरंड कप, प्रेसिडेंट्स कप और शिमला ट्रॉफी—को औपचारिक रूप से रवाना किया था। इसके बाद शिलांग टूर्नामेंट के पांच मेजबान शहरों में पहला शहर बना, जहां ट्रॉफी टूर की शुरुआत हुई।

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शिलांग में आयोजित समारोह में मेघालय की समृद्ध फुटबॉल परंपरा और डूरंड कप के गौरवशाली इतिहास को विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में डूरंड कप की विरासत पर प्रस्तुति दी गई, राष्ट्रपति भवन में आयोजित ट्रॉफी अनावरण और फ्लैग-ऑफ समारोह का विशेष वीडियो दिखाया गया, तथा 15 सदस्यीय खमीह क्रिएटिव सोसाइटी ने अपनी मधुर प्रस्तुति से माहौल को और भी यादगार बना दिया। इस दौरान तीनों ट्रॉफियों का औपचारिक प्रदर्शन किया गया और विशिष्ट अतिथियों के बीच स्मृति-चिन्हों का आदान-प्रदान भी हुआ।

इस अवसर पर खेल एवं युवा मामलों के मंत्री वैलादमिकी शायला ने कहा कि मेघालय में फुटबॉल केवल एक खेल नहीं, बल्कि लोगों की पहचान और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि फुटबॉल राज्य के युवाओं को प्रेरित करता है, समुदायों को जोड़ता है और पूरे मेघालय को गर्व का एहसास कराता है। उन्होंने भारतीय सशस्त्र बलों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लगातार तीसरे वर्ष मेघालय को डूरंड कप की मेजबानी का अवसर मिला है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में शिलांग को डूरंड कप फाइनल की मेजबानी करने का भी मौका मिलेगा।

समारोह के बाद मंत्री ने ट्रॉफी काफिले को हरी झंडी दिखाई। इसके बाद ट्रॉफी टूर शिलांग की प्रमुख जगहों से होकर गुजरा। कैमल बैक रोड, सिविल हॉस्पिटल, उमशिरपी ब्रिज, शिलांग पीक, नोंग्थिम्मई, लैतुमखरा, धनखेती पॉइंट, बारिक पॉइंट और खिन्डैलैड जैसे प्रमुख स्थानों से गुजरते हुए यह यात्रा एसआरजीटी ग्राउंड, पोलो स्थित मुख्यमंत्री फुटबॉल फैन पार्क में समाप्त हुई। इस ट्रॉफी यात्रा का उद्देश्य फुटबॉल प्रेमियों को टूर्नामेंट की ऐतिहासिक ट्रॉफियों के करीब लाना और पूरे राज्य में प्रतियोगिता को लेकर उत्साह का माहौल तैयार करना है।

इस अवसर पर 101 एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल मोहित वाधवा ने कहा कि कुछ शहर फुटबॉल की मेजबानी करते हैं, जबकि कुछ शहर फुटबॉल को जीते हैं और शिलांग निश्चित रूप से दूसरे वर्ग में आता है। उन्होंने कहा कि यहां के फुटबॉल प्रशंसकों का जुनून, खेल की समझ और खिलाड़ियों के प्रति समर्थन पूरे देश में मिसाल माना जाता है। उनके अनुसार, मेघालय अब डूरंड कप की पहचान का अहम हिस्सा बन चुका है और हर साल यहां लौटना आयोजकों के लिए गर्व की बात है।

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इस वर्ष भी शिलांग टूर्नामेंट के प्रमुख केंद्रों में शामिल रहेगा। यहां ग्रुप-ई के मुकाबले खेले जाएंगे, जिनमें मुंबई एफसी, शिलांग लाजोंग एफसी, लैंग्सिंग एफसी और नोंगकसेह एसएस एंड सीसी जैसी टीमें हिस्सा लेंगी। शहर में कुल आठ मुकाबले आयोजित होंगे, जिनमें एक क्वार्टर फाइनल और एक सेमीफाइनल भी शामिल है। इससे शिलांग की पहचान भारत के सबसे मजबूत फुटबॉल केंद्रों में और मजबूत होगी।

शिलांग के अलावा ट्रॉफी टूर जोवाई और तुरा भी जाएगा। इसके बाद 15 जुलाई को ट्रॉफियां इम्फाल पहुंचेंगी और फिर अन्य मेजबान शहरों का दौरा करेंगी। इस यात्रा का उद्देश्य टूर्नामेंट से पहले देशभर में फुटबॉल प्रशंसकों को जोड़ना और प्रतियोगिता के प्रति उत्साह बढ़ाना है।

135वां इंडियन ऑयल डूरंड कप 25 जुलाई से 23 अगस्त 2026 तक कोलकाता, शिलांग, इम्फाल, गुवाहाटी और रांची में आयोजित होगा। खास बात यह है कि झारखंड की राजधानी रांची पहली बार टूर्नामेंट की मेजबानी करेगी। प्रतियोगिता में कुल 24 टीमें हिस्सा लेंगी, जिनमें श्रीलंकाई आर्म्ड फोर्सेज की विदेशी टीम भी शामिल है। पूरे टूर्नामेंट में 43 मुकाबले खेले जाएंगे।

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शिलांग के अलावा ट्रॉफी टूर जोवाई और तुरा भी जाएगा। इसके बाद 15 जुलाई को ट्रॉफियां इम्फाल पहुंचेंगी और फिर अन्य मेजबान शहरों का दौरा करेंगी। इस यात्रा का उद्देश्य टूर्नामेंट से पहले देशभर में फुटबॉल प्रशंसकों को जोड़ना और प्रतियोगिता के प्रति उत्साह बढ़ाना है।

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भारतीय सेना की ईस्टर्न कमांड द्वारा तीनों सेनाओं की ओर से आयोजित डूरंड कप की शुरुआत वर्ष 1888 में हुई थी। 138 वर्षों की अपनी समृद्ध विरासत के साथ यह टूर्नामेंट आज भी भारतीय फुटबॉल का सबसे प्रतिष्ठित मंच माना जाता है। यह प्रतियोगिता देश के स्थापित खिलाड़ियों, उभरती प्रतिभाओं और सर्विसेज टीमों को अपनी क्षमता दिखाने का बड़ा अवसर प्रदान करती है। 135वें संस्करण के साथ एक बार फिर भारतीय फुटबॉल का यह ऐतिहासिक आयोजन देशभर के प्रशंसकों के लिए रोमांच और प्रतिस्पर्धा का शानदार उत्सव लेकर आने को तैयार है।

Article Source: IANS

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