FIFA World Cup: इंग्लैंड के हेड कोच थॉमस ट्यूशेल ने तीसरे स्थान के लिए हुए मुकाबले में फ्रांस पर 6-4 की शानदार जीत के बाद टीम की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों ने मुश्किल हालात में जिस जज्बे और मानसिक मजबूती का परिचय दिया, वह काबिल-ए-तारीफ है।

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ट्यूशेल के अनुसार, ऐसा लड़ने का जज्बा दिखाने वाली टीम को खेलते देखना किसी भी कोच के लिए गर्व की बात होती है। मियामी में खेले गए इस रोमांचक मुकाबले में इंग्लैंड ने पहले हाफ में ही 4-0 की मजबूत बढ़त बना ली थी। टीम की ओर से बुकायो साका ने शानदार हैट्रिक लगाई, जबकि बाकी खिलाड़ियों ने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया।

दूसरे हाफ में फ्रांस ने जोरदार वापसी की। एम्बाप्पे ने टीम की ओर से दो गोल दागे, जबकि बारकोला और उस्मान डेम्बेल ने एक-एक गोल किया। हालांकि, इंग्लैंड ने जूड बेलिंगहम द्वारा इंजरी टाइम में किए गए छठे गोल की बदौलत मैच को आसानी से अपने नाम करते हुए ब्रॉन्ज मेडल पर कब्जा जमाया।

1966 में विश्व कप का खिताब जीतने के बाद यह इंग्लैंड का दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। इससे पहले, 1990 में इंग्लैंड चौथे स्थान पर रहा था, जबकि 2018 विश्व कप में भी टीम ने टूर्नामेंट का अंत चौथे स्थान पर रहते हुए ही किया था। मैच के बाद ट्यूशेल ने कहा कि पहले हाफ में उनकी टीम ने शानदार खेल दिखाया, लेकिन दूसरे हाफ में मुकाबला काफी कठिन हो गया था। उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों पर लगातार मैच खेलने का असर साफ दिखाई दे रहा था और टीम शारीरिक रूप से काफी थकी हुई थी। इसके बावजूद प्लेयर्स ने हार नहीं मानी और अंत तक पूरे जोश के साथ खेलते रहे।

ट्यूशेल ने कहा कि फ्रांस को रिकवरी के लिए एक दिन ज्यादा मिला था और उन्हें इंग्लैंड की तुलना में कम यात्रा भी करनी पड़ी थी। वहीं, इंग्लैंड को पूरे टूर्नामेंट के दौरान गर्म मौसम, लंबी यात्राओं और कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। दूसरे हाफ में कई खिलाड़ियों को थकान और क्रैम्प्स की परेशानी हुई, लेकिन किसी ने भी हिम्मत नहीं छोड़ी।

1966 में विश्व कप का खिताब जीतने के बाद यह इंग्लैंड का दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। इससे पहले, 1990 में इंग्लैंड चौथे स्थान पर रहा था, जबकि 2018 विश्व कप में भी टीम ने टूर्नामेंट का अंत चौथे स्थान पर रहते हुए ही किया था। मैच के बाद ट्यूशेल ने कहा कि पहले हाफ में उनकी टीम ने शानदार खेल दिखाया, लेकिन दूसरे हाफ में मुकाबला काफी कठिन हो गया था। उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों पर लगातार मैच खेलने का असर साफ दिखाई दे रहा था और टीम शारीरिक रूप से काफी थकी हुई थी। इसके बावजूद प्लेयर्स ने हार नहीं मानी और अंत तक पूरे जोश के साथ खेलते रहे।

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हालांकि, इंग्लैंड सेमीफाइनल में अर्जेंटीना से हारकर फाइनल में जगह नहीं बना सका, लेकिन ट्यूशेल का मानना है कि ब्रॉन्ज मेडल जीतने से टीम का आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों ने जिस तरह अंत तक संघर्ष किया, उसे देखकर उन्हें नई ऊर्जा मिली है। ट्यूशेल ने कहा कि ऐसी टीम के साथ काम करना गर्व की बात है, क्योंकि यह टीम कभी हार नहीं मानती और हर चुनौती का डटकर सामना करती है।

Article Source: IANS

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