भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान बाइचुंग भूटिया ने भारतीय फुटबॉल के विकास, नई खेल नीतियों और कॉमनवेल्थ गेम्स पर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि भारतीय फुटबॉल में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद है और इसके लिए नई सरकार और संबंधित संस्थाओं को पर्याप्त समय देना होगा।
पूर्व कप्तान ने फुटबॉल के विकास के लिए जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों के विकास पर विशेष जोर दिया।
मीडिया से बातचीत करते हुए भूटिया ने कहा, "नई सरकार कई महत्वपूर्ण बदलाव करने की दिशा में काम करेगी और खिलाड़ियों तथा खेलों के हित में फैसले लिए जाएंगे। हमें नई सरकार को समय देना चाहिए। हम खिलाड़ियों की हर संभव मदद करने के लिए तैयार हैं।"
उन्होंने कहा कि भारतीय फुटबॉल संघ (आईएफए) को अपना दायरा केवल कोलकाता तक सीमित नहीं रखना चाहिए। संघ को पूरे राज्य और विशेष रूप से हर जिले में फुटबॉल के विकास पर समान रूप से ध्यान देना चाहिए। उत्तर बंगाल में कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद हैं, जिन्हें सही अवसर और बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 पर भूटिया ने कहा कि इस बार प्रतियोगिता में खेलों की संख्या काफी सीमित है। इससे कई देशों, खासकर भारत, की पदक संभावनाओं पर असर पड़ेगा। भारत को कुश्ती सहित कई खेलों में पदक जीतने की अच्छी उम्मीद रहती है, लेकिन कुश्ती के शामिल नहीं होने से भारतीय दल को पदकों का नुकसान हो सकता है।
भारतीय फुटबॉल के विकास के लिए भूटिया ने छोटे देशों के खेल मॉडल का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत को कुरासाओ और काबो वर्डे जैसे देशों से सीख लेने की जरूरत है। बेहद कम आबादी होने के बावजूद ये देश फुटबॉल में लगातार अच्छे खिलाड़ी तैयार कर रहे हैं। इसके पीछे मजबूत जमीनी ढांचा, लंबी अवधि की योजना और युवा खिलाड़ियों पर निरंतर निवेश है।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 पर भूटिया ने कहा कि इस बार प्रतियोगिता में खेलों की संख्या काफी सीमित है। इससे कई देशों, खासकर भारत, की पदक संभावनाओं पर असर पड़ेगा। भारत को कुश्ती सहित कई खेलों में पदक जीतने की अच्छी उम्मीद रहती है, लेकिन कुश्ती के शामिल नहीं होने से भारतीय दल को पदकों का नुकसान हो सकता है।
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भूटिया ने कहा कि भारत में भी यदि ग्रासरूट स्तर पर योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाए, स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर दिए जाएं और जिलों तक खेल ढांचे का विस्तार किया जाए, तो भारतीय फुटबॉल नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है। खिलाड़ियों, प्रशासकों और सरकार के सामूहिक प्रयास से भारतीय फुटबॉल का भविष्य बेहतर बनाया जा सकता है।