एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला और पुरुष कबड्डी टीमों ने गोल्ड मेडल जीते। दोनों ही टीमों ने ईरान को हराकर गोल्ड मेडल जीते। एशियन गेम्स के पिछले संस्करण में भी भारत की ही महिला और पुरुष कबड्डी टीमों ने गोल्ड मेडल जीते थे। कबड्डी में यह प्रदर्शन भारत की निरंतरता के साथ-साथ दबदबे को प्रदर्शित करता है।

कबड्डी मूलतः भारत का खेल है। भारत में यह खेल करीब 4,000 साल से खेला जाता है। 1918 में इस खेल को राष्ट्रीय स्तर का दर्जा मिला। 1923 में इस खेल के पहली बार लिखित नियम तैयार किए गए और मुंबई में अखिल भारतीय टूर्नामेंट हुआ। 1936 में बर्लिन में हुए ओलंपिक में इस खेल को दुनिया ने देखा। हालांकि, इसके बाद से कबड्डी कभी ओलंपिक का हिस्सा नहीं रहा। कबड्डी कॉमनवेल्थ गेम्स का भी हिस्सा नहीं है। इसकी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर (निश्चित देशों और महाद्वीपों में) इसकी आवश्यक लोकप्रियता और मानकों का पूरा न होना है। हालांकि, भारत इस खेल को कॉमनवेल्थ गेम्स में शामिल किए जाने का पैरोकार रहा है। एशियन गेम्स में कबड्डी निरंतर तौर पर खेली जाती है।

एशियन गेम्स के इतिहास में भारतीय पुरुष कबड्डी टीम ने 9 और महिला कबड्डी टीम ने 4 स्वर्ण पदक जीते हैं।

भारत में कबड्डी बेहद लोकप्रिय है। पुरुष और महिलाएं दोनों ही कबड्डी में रुचि लेते हैं और दोनों वर्गों में राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर की टीमें हैं। भारत में इस खेल की लोकप्रियता और सफलता की वजह संरचनात्मक रूप से इसका सफल संचालन है।

भारत में कबड्डी की राष्ट्रीय स्तर की शीर्ष संस्था एमेच्योर कबड्डी फेडरेशन ऑफ इंडिया (एकेएफआई) है। इसकी स्थापना 1972-73 में हुई थी। संस्था भारत में कबड्डी खेल को नियंत्रित करती है तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिताओं का आयोजन व संचालन करती है। एकेएफआई, भारतीय ओलंपिक संघ, एशियाई कबड्डी महासंघ और अंतरराष्ट्रीय कबड्डी महासंघ से संबद्ध है।

इसके अलावा, देश के प्रत्येक राज्य का अपना आधिकारिक राज्य कबड्डी संघ है, जो एमेच्योर कबड्डी फेडरेशन ऑफ इंडिया (एकेएफआई) से संबद्ध होता है। मौजूदा समय में एकेएफआई के अंतर्गत 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के संघ मान्यता प्राप्त हैं, जो अपने-अपने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कबड्डी खेल का संचालन, नियंत्रण और राज्य स्तरीय चैंपियनशिप का आयोजन करते हैं।

राज्य स्तर पर होने वाली प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौका दिया जाता है।

भारत और दक्षिण एशिया में कबड्डी मुख्य रूप से दो प्रकार (मानक शैली और सर्कल शैली) की होती है।

मानक शैली में प्रत्येक टीम में 12 खिलाड़ी होते हैं, जिनमें से 7 खिलाड़ी मैदान पर उतरते हैं और 5 खिलाड़ी रिजर्व होते हैं। इसे आधिकारिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है। प्रो कबड्डी लीग (पीकेएल), एशियाई खेल और विश्व कप इसी शैली में खेले जाते हैं। इसमें 'बाल्क लाइन', 'बोनस लाइन' और 'लॉबी' होती है। कोई खिलाड़ी आउट होने पर बाहर जाता है और अपनी टीम को पॉइंट मिलने पर वह पुनर्जीवित होता है। यह एक आयताकार मैट पर खेली जाती है। पुरुषों के लिए कोर्ट का आकार 13 × 10 मीटर होता है।

सर्कल शैली में भी दोनों टीमों में 7-7 खिलाड़ी होते हैं। यह खुले मैदान में एक गोलाकार कच्चे या मिट्टी के कोर्ट पर खेली जाती है। इसमें मैट वाले नियम (जैसे बाल्क लाइन या बोनस लाइन) नहीं होते। टैकल करने का तरीका अलग होता है—इसमें मुख्य रूप से वन-ऑन-वन टैकल होता है, यानी रेडर को पकड़ने के लिए सिर्फ एक डिफेंडर आगे आता है (यदि कोई दूसरा डिफेंडर बीच में आता है तो फाउल माना जाता है)। यह शैली मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, कनाडा और अमेरिका में लोकप्रिय है।

मानक शैली में प्रत्येक टीम में 12 खिलाड़ी होते हैं, जिनमें से 7 खिलाड़ी मैदान पर उतरते हैं और 5 खिलाड़ी रिजर्व होते हैं। इसे आधिकारिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है। प्रो कबड्डी लीग (पीकेएल), एशियाई खेल और विश्व कप इसी शैली में खेले जाते हैं। इसमें 'बाल्क लाइन', 'बोनस लाइन' और 'लॉबी' होती है। कोई खिलाड़ी आउट होने पर बाहर जाता है और अपनी टीम को पॉइंट मिलने पर वह पुनर्जीवित होता है। यह एक आयताकार मैट पर खेली जाती है। पुरुषों के लिए कोर्ट का आकार 13 × 10 मीटर होता है।

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Article Source: IANS

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