भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज खिलाड़ी रहे सुरेश रैना ने अपने खेल के दिनों को याद करते हुए बताया कि किस तरह अनुशासन और कड़ी तैयारी ने भारतीय टीम की फील्डिंग का स्तर बदल दिया था। रैना ने कहा कि लगातार अभ्यास की संस्कृति ने भारत को दुनिया की सबसे बेहतरीन फील्डिंग इकाइयों में से एक बनने में मदद की।
अपने शुरुआती दिनों की तैयारियों, सीनियर खिलाड़ियों के प्रभाव और ऑस्ट्रेलिया में हुए एक यादगार ऑन-फील्ड टकराव को याद करते हुए रैना ने बताया कि कड़ी मेहनत, आदर्श खिलाड़ियों और सीख ने उनके फील्डिंग करियर को आकार दिया। भारत के सबसे भरोसेमंद फील्डरों में से एक बनाया।
दिग्गज खिलाड़ी ने जियोस्टार से कहा, "हमने फील्डिंग की एक संस्कृति बनाई थी। सभी खिलाड़ी आधा घंटा पहले मैदान पर पहुंच जाते थे क्योंकि हमारी ट्रेनिंग की शुरुआत हमेशा फील्डिंग से होती थी। आज की तरह नहीं कि कुछ कैच पकड़ लिए और फील्डिंग सत्र खत्म हो गया। उस समय हम अलग-अलग हाई कैच, ग्राउंड फील्डिंग, स्लिप कैच और पैरेलल कैच का अभ्यास करते थे। बीच में एक स्टंप लगाया जाता था। कैफ भाई उत्तर प्रदेश के कप्तान थे, वह कहते थे, 'अगर सीधे स्टंप पर थ्रो नहीं मारोगे, तो प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिलेगी।' इन्हीं कठिन अभ्यास सत्रों ने उनकी फील्डिंग को मजबूत आधार दिया।"