टी20 विश्व कप 2026 की शुरुआत बेहद रोमांचक रही है। 20 टीमों के इस बड़े टूर्नामेंट से पहले यह अनुमान लगाया जा रहा था कि बड़ी टीमें कमजोर मानी जाने वाली टीमों के खिलाफ आसानी से जीत दर्ज करेंगी। लेकिन अब तक खेले गए मुकाबलों ने इन धारणाओं को काफी हद तक चुनौती दी है। कई मैच ऐसे रहे हैं, जहां अप्रत्याशित नतीजे बहुत ही कम अंतर से टल गए और बड़ी टीमें किसी तरह शर्मिंदगी से बच पाईं।
क्रिकेट जैसे खेल के किसी भी वैश्विक आयोजन में 20 टीमों की मौजूदगी किसी भी स्तर पर काफी ज्यादा है। विश्व कप जैसी प्रतियोगिताओं में यह तर्क अक्सर दिया जाता रहा है कि कम टीमों के साथ टूर्नामेंट कराने से गुणवत्ता बेहतर रहती है और दर्शकों को उच्च स्तर का क्रिकेट देखने को मिलता है। बड़े प्लेटफॉर्म पर छोटी टीमों को अक्सर दरकिनार भी किया जाता रहा है, लेकिन टी20 विश्व कप 2026 ने अपनी शुरुआत से ही यह दिखा दिया है कि टी20 फॉर्मेट को हल्के में नहीं लिया जा सकता और परिणामों की अनिश्चितता ही इसकी सबसे बड़ी पहचान है।
अगर ग्रुप स्टेज पर नजर डालें, तो हर ग्रुप में एक या दो मजबूत टीमों के साथ कई ऐसी टीमें शामिल हैं जिन्हें कागजों पर कमजोर माना जाता है। भारत के ग्रुप में नामीबिया, नीदरलैंड और अमेरिका जैसी टीमें हैं। ग्रुप बी में श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया के साथ जिम्बाब्वे, ओमान और आयरलैंड को रखा गया है। ग्रुप सी में वेस्टइंडीज और इंग्लैंड के साथ इटली, नेपाल और स्कॉटलैंड हैं, जबकि ग्रुप डी में न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के साथ अफगानिस्तान, यूएई और कनाडा शामिल हैं। कागजों पर ये मुकाबले एकतरफा लग सकते हैं, लेकिन जब टी20 फॉर्मेट में टीमें मैदान पर उतरती हैं, तो यही मुकाबले रोमांचक और प्रतिस्पर्धी बन जाते हैं।