एशियन पैरा गेम्स 2026 में पुरुषों की 100 मीटर बैकस्ट्रोक स्पर्धा में चौथे स्थान पर रहने से भारतीय पैरा-तैराक हिमांशु नंदल को इतनी निराशा हुई कि उन्हें खुद को आगे बढ़ने के लिए समझाना पड़ा। इस मानसिक बदलाव ने 22 वर्षीय खिलाड़ी को वापसी करने में मदद की, जिसके बाद उन्होंने जापान के आइची-नागोया में कांस्य पदकों की हैट्रिक पूरी की।
नंदल ने बताया कि इस नतीजे से उन्हें गहरा धक्का लगा था। उनके अभियान में अभी भी पांच इवेंट बाकी थे, इसलिए उन्होंने पीछे मुड़कर उस चूके हुए मौके के बारे में सोचने के बजाय आगे की ओर देखने का फैसला किया। हिमांशु नंदल ने 'आईएएनएस' को दिए एक इंटरव्यू में कहा, "100 मीटर बैकस्ट्रोक मेरे मुख्य इवेंट्स में से एक था और मैं पिछले दो वर्षों से इसका इंतजार कर रहा था। मैं 100 मीटर बैकस्ट्रोक में हिस्सा लेना चाहता था और अपना 'पर्सनल बेस्ट' (सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन) देना चाहता था, क्योंकि मैं इस इवेंट को लेकर बहुत जुनूनी हूं, हालांकि पता नहीं क्यों, उस दिन मेरा शरीर जैसे साथ ही नहीं दे रहा था। सब कुछ ठीक से नहीं हो पाया, मैं अपना 'पर्सनल बेस्ट' नहीं दे सका और उस दिन मुझे बहुत बुरा लगा।"
उन्होंने कहा, "हालांकि अगले दिन मैंने खुद को समझाने की कोशिश की और यह काम भी कर गया कि मुझे आगे के इवेंट्स पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि अभी पांच इवेंट बाकी थे। मन में कहीं न कहीं वह निराशा बनी रही, लेकिन मैंने अगले इवेंट्स के लिए और ज्यादा मेहनत की और अपना पूरा ध्यान इस बात पर लगाया कि आगे क्या करना है।"