24 अप्रैल 2007 को जमैका के मैदान पर वर्ल्ड कप 2007 का पहला सेमीफाइनल खलने के लिए श्रीलंका और न्यूजीलैंड की टीम आमने – सामने थी। श्रीलंका के कप्तान महेला जयवर्धने ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज जेम्स फ्रेंकलिन ने तीसरे ओवर में सनथ जयसूर्या को आउट कर श्रीलंकन टीम को जबरदस्त झटका दिया।  मैदान पर अपने बेहद ही उम्दा रणनीति के लिए मशहूर न्यूजीलैंड के कप्तान स्टीफन फ्लेमिंग से उम्मीद की जा रही थी कि उनकी कप्तानी में टीम शानदार प्रदर्शन करेगी।

 कुमार संगाकारा को भी फैंकलिन ने सिमित समय में पवेलियन भेज कर न्यूजीलैंड को सकारात्मक सोच के पैमाने पर ला खड़ा कर दिया। 13.1 ओवर में श्रीलंका के 2 विकेट 67 रन पर आउट होने के बाद श्रीलंकन टीम दबाव में थी। ऐसे में कप्तान महेला के ऊपर बड़ी जिम्मेदारी थी कि बेहतर खेल दिखा कर श्रीलंका को न्यूजीलैंड के सामने चुनौतिपूर्ण स्कोर तक ले जा सके। उपुल थरंगा औऱ महेला जयवर्धने ने धैर्य़ के साथ बल्लेबाजी कर टीम को संभाला। 73 रन बनानें के बाद थरंगा को न्यूजीलैंड के बेहतरीन स्पिनर डेनियल विट्टोरी ने क्लीन बोल्ड कर फिर से श्रीलंका को खतरे के निशान पर ला दिया। लेकिन एक तरफ से श्रीलंका की पारी को संवारने में लगे कप्तान महेला ने अपनी बल्लेबाजी का बेहद ही प्रदर्शन कर स्टीफन फ्लेमिंग के हर एक दांव की हवा निकाल दी। महेला जयवर्धने ने इसके बाद अपने बल्लेबाजी का कारनामा दिखाया जिससे न्यूजीलैंड  की टीम श्रीलंका की पारी को 250 के अंदर रोक पाने में नाकाम हो गई। जयवर्धने ने तिलकरत्ने दिलशान के साथ मिलकर  पांचवें विकेट के लिए केवल 46  गेंद पर पचास रनों की साझेदारी कर श्रीलंका को 250 रन तक पहुंचा दिया। 

महेला जयवर्धने ने 104  गेंदों पर अपना शतक पूरा किया जिसमें 2 छक्के औऱ 9 शानदार चौके शामिल थे। अंतिम के 10 ओवरों में श्रीलंका के बल्लेबाजों ने तेजी से रन बनाते हुए 102 रन बटोर डाले जिससे श्रीलंका का स्कोर 50 ओवर में 5 विकेट के नुकसान पर 289 रन पर समाप्त हुआ।  महेला जयवर्धने ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए नाबाद 115 रनों की पारी खेली जिससे मैच का पूरी समीकरण श्रीलंका के पाले में चला गया था ।

श्रीलंकन गेंदबाजों ने अपने कप्तान की जुझारूपन से सबक लेते हुए अपने गेंदबाजी आक्रमण का ऐसा चक्रव्यूह न्यूजीलैंड बल्लेबाजों के समक्ष पैदा किया जिससे कोई भी किवी बल्लेबाज मैदान पर टीक कर बड़ा स्कोर नही बना पाया। 

खास कर श्रीलंकन स्पिन गेंदबाज मुथ्थैया मुरलीधरन ने अपनी घुमती बॉल से न्यूजीलैंड बल्लेबाजों को इस कदर परेशान किया कि कोई भी क्रीज पर टिक नहीं पाया। जयसूर्या,दिलशान मलिंगा सभी ने कप्तान जयवर्धने की पारी को नाकाम नहीं होने दिया। 

न्यूजीलैंड की पूरी टीम को 41.4 ओवरों में 208 रन पर ऑल आउट कर श्रीलंका ने फाइनल मैच खेलना का टिकट अपने नाम कर लिया। न्यूजीलैंड के तरफ से सलामी बल्लेबाज पीटर फूलटोन 46 रन, और पुछल्ले बल्लेबाज जीतन पटेल 34 रन और जेम्स फ्रैंकलिन ने 30 रन बनाकर न्यूजीलैंड के पस्त हुए होसलों को बचाए रखा था। न्यूजीलैंड की पारी में 6 बल्लेबाज ऐसे रहे थे जो दहाई का आकड़ा भी नहीं छू पाए थे। 

कप्तान महेला जयवर्धने को मैच जीताऊ और बेहद ही कठिन समय में खेली गई पारी के लिए मैन ऑफ द मैच के अवॉर्ड से नवाजा गया था। 

विशाल भगत/Cricketnmore

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लेखक के बारे में

Saurabh Sharma
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