जर्मनी के मशहूर फुटबॉल कोच डाइटमार बेयर्सडॉर्फर 'मिनी ब्राजील' के नाम से मशहूर विचारपुर गांव पहुंचे। इस दौरान बियर्सडोर्फ ने गांव में पीढ़ियों से चली आ रही फुटबॉल की परंपरा, यहां के युवाओं का जुनून और खेल के प्रति उनकी निरंतर प्रतिबद्धता को महसूस किया।

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बेयर्सडॉर्फर ने न केवल स्थानीय खिलाड़ियों से मुलाकात की, बल्कि उन परिवारों से भी रू-ब-रू हुए, जिनके बच्चे हाल ही में जर्मनी जाकर फुटबॉल के आधुनिक प्रशिक्षण से लौटे हैं।

जर्मनी के पूर्व फुटबॉलर ने बताया कि यह जुनून किसी भी बड़े फुटबॉल राष्ट्र से कम नहीं है, और यही यहां की असली ताकत है।

उल्लेखनीय है कि कुछ महीनों पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पॉडकास्टर लेक्स फ्रिडमैन के साथ बातचीत के दौरान मध्यप्रदेश के शडहोल जिले को 'मिनी ब्राजील' नाम से संबोधित किया था।

पीएम ने यहां के युवाओं की फुटबॉल के प्रति दीवानगी और लगातार उभरती प्रतिभा को सराहा था। प्रधानमंत्री की इस सराहना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रभाव डाला।

इससे प्रभावित होकर जर्मनी के फुटबॉल कोच डाइटमार बेयर्सडॉर्फर ने विचारपुर के 5 युवा खिलाड़ियों को जर्मनी में उन्नत प्रशिक्षण देने के लिए आमंत्रित किया था। ये खिलाड़ी कुछ सप्ताह पहले जर्मनी में ट्रेनिंग लेकर लौटे हैं, जहां उन्होंने यूरोपीय फुटबॉल की तकनीक, फिटनेस और आधुनिक कोचिंग का अनुभव हासिल किया।

कोच बेयर्सडॉर्फर ने जर्मनी में प्रशिक्षण के दौरान इन खिलाड़ियों से वादा किया था कि वह खुद विचारपुर आकर उन खिलाड़ियों के गांव, उनके परिवार और फुटबॉल कल्चर को देखेंगे। आखिरकार, शहडोल ने वादा निभाया। कोच ने स्थानीय कोचों और ग्रामीणों से भी चर्चा करने के साथ भविष्य में तकनीकी सहयोग, ट्रेनिंग कैंप और एक्सचेंज प्रोग्राम की संभावनाओं पर सकारात्मक संकेत दिए।

इस दौरान बेयर्सडॉर्फर ने खिलाड़ियों के परिजनों से बातचीत की, उनके संघर्ष और समर्पण की कहानियां सुनीं। बेयर्सडॉर्फर ने कहा कि इस खेल को लेकर जिस स्तर का जुनून विचारपुर में है, वह उन्हें ब्राजील और यूरोप के पारंपरिक फुटबॉल समुदायों की याद दिलाता है।

जर्मन कोच ने विचारपुर के खिलाड़ियों की तारीफ करते हुए कहा, यहां के बच्चों में फुटबॉल के प्रति जो जुनून और ऊर्जा है, वह वाकई अद्भुत है। ये बच्चे भविष्य में देश का नेतृत्व करने की पूरी क्षमता रखते हैं।"

उन्होंने भारत और जर्मनी के बीच फुटबॉल सहयोग को एक नए क्रांतिकारी अध्याय की शुरुआत के रूप में देखने से जुड़े सवाल पर कहा कि यह सिर्फ एक दौरा नहीं, बल्कि पारस्परिक विश्वास और साझेदारी की शुरुआत है।

डाइटमार ने बताया कि उन्होंने 14–15 साल की उम्र में फुटबॉल खेलना शुरू किया था। खेल के प्रति जुनून ने ही उन्हें जर्मन नेशनल टीम तक पहुंचाया।

उन्होंने भारत और जर्मनी के बीच फुटबॉल सहयोग को एक नए क्रांतिकारी अध्याय की शुरुआत के रूप में देखने से जुड़े सवाल पर कहा कि यह सिर्फ एक दौरा नहीं, बल्कि पारस्परिक विश्वास और साझेदारी की शुरुआत है।

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कोच ने भारत और जर्मनी के बीच खेल सहयोग को और मजबूत बनाने पर चर्चा करते हुए कहा, "हम अब एक-दूसरे से जुड़ चुके हैं। अनुभवों और तकनीकों का आदान-प्रदान जारी है। मैं बड़े वादे करने में विश्वास नहीं रखता, लेकिन यह यात्रा एक मजबूत नींव रख चुकी है। हम भारत आए हैं, ताकि यहां की वास्तविक परिस्थितियों और यहां के खिलाड़ियों की क्षमता को गहराई से समझ सकें। हमें भरोसा है कि इस साझेदारी के परिणाम जल्द ही मैदान में नजर आएंगे।"

Article Source: IANS

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