Ranji Trophy Final: 'मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है। पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।' यह पंक्तियां जम्मू-कश्मीर की टीम पर पूरी तरह से सही बैठती हैं। जम्मू-कश्मीर की टीम का वो हौसला ही था, जिसके दम पर टीम ने रणजी ट्रॉफी में 67 साल का लंबा इंतजार शनिवार को खत्म कर दिया। जम्मू-कश्मीर ने 8 बार की चैंपियन कर्नाटक के खिलाफ फाइनल में ड्रॉ खेला और पहली पारी के आधार पर बढ़त के चलते ट्रॉफी अपने नाम की।

Advertisement

जम्मू कश्मीर ने रणजी ट्रॉफी में अपना पहला मुकाबला 1959 में खेला था। शुरुआती दौर में बड़ी टीमों के लिए जम्मू-कश्मीर को हराना बाएं हाथ का खेल हुआ करता था। 90 के दशक में जम्मू-कश्मीर की टीम मैदान पर उतरती और अंत में हारकर ड्रेसिंग रूम लौट आती। टीम के पास न तो मूलभूत सुविधाएं थीं और न ही प्लेइंग इलेवन में स्टार खिलाड़ी।

Advertisement

क्रिकेट में जम्मू-कश्मीर की तकदीर को पलटने के लिए सबसे अहम था कि टीम के खिलाड़ियों की मानसिकता को बदला जाए। यह काम भारत के पूर्व कप्तान बिशन सिंह बेदी ने कोचिंग की जिम्मेदारी संभालने के बाद किया। उन्होंने टीम के ड्रेसिंग रूम में जीत का जज्बा जगाया और खिलाड़ियों को मैदान पर लड़ने की कला भी सिखाई।

बिशन सिंह बेदी ने टीम में जान डालने का काम किया और नतीजा यह हुआ कि जम्मू-कश्मीर साल 2013-14 के रणजी सीजन में पहली बार क्वार्टर फाइनल का टिकट हासिल करने में सफल रही। इस प्रदर्शन ने जम्मू-कश्मीर को वो आत्मविश्वास दिया, जिसकी जरूरत टीम को लंबे समय से थी।

जम्मू-कश्मीर के लिए सबसे बड़ा पल 2014-15 के रणजी सीजन में आया। परवेज रसूल की कप्तानी में जम्मू-कश्मीर ने इस घरेलू टूर्नामेंट की सबसे सफल टीम मुंबई को ग्रुप स्टेज मंे हराते हुए हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचा।

5 अगस्त 2019 को आर्टिकल 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर के क्रिकेट में कुछ सकारात्मक बदलाव देखने को मिले। प्रशासनिक सुधारों और निगरानी के कारण चयन प्रक्रिया व फंड के उपयोग में पारदर्शिता बढ़ी। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर के बुनियादी ढांचे में भी काफी सुधार आया। नए प्रशिक्षण केंद्र और टर्फ बनाए गए। बीसीसीआई से सीधा संपर्क होने की वजह से खिलाड़ियों को बेहतर कोचिंग, उपकरण और एक्सपोजर भी मिला।

Advertisement

हालांकि, जम्मू-कश्मीर क्रिकेट की तकदीर असल मायनों में तब पलटी जब बीसीसीआई के मौजूदा अध्यक्ष मिथुन मन्हास ने जम्मू-कश्मीर क्रिकेट संघ की जिम्मेदारी को संभाला। मन्हास ने जमीनी स्तर पर वो सभी प्रशासनिक सुधार किए, जिनकी जम्मू-कश्मीर टीम को सख्त जरूरत थी। मन्हास ने अहम फैसला लेते हुए अजय शर्मा को जम्मू-कश्मीर का मुख्य कोच नियुक्त किया।

अजय शर्मा ने 2022 में बतौर कोच जिम्मेदारी संभाली और जम्मू-कश्मीर क्रिकेट की तकदीर को ही पलटकर रख दिया। उन्होंने टीम में आत्मविश्वास भरा, जीतने का जज्बा जगाया और मैदान पर लड़ने का हुनर भी सिखाया। कप्तान पारस डोगरा और जम्मू-कश्मीर की टीम कोच के दिखाए रास्ते पर चल पड़ी और आखिरकार वर्षों की मेहनत और लगन का फल रणजी ट्रॉफी 2025-26 में चला।

हालांकि, जम्मू-कश्मीर क्रिकेट की तकदीर असल मायनों में तब पलटी जब बीसीसीआई के मौजूदा अध्यक्ष मिथुन मन्हास ने जम्मू-कश्मीर क्रिकेट संघ की जिम्मेदारी को संभाला। मन्हास ने जमीनी स्तर पर वो सभी प्रशासनिक सुधार किए, जिनकी जम्मू-कश्मीर टीम को सख्त जरूरत थी। मन्हास ने अहम फैसला लेते हुए अजय शर्मा को जम्मू-कश्मीर का मुख्य कोच नियुक्त किया।

Also Read: LIVE Cricket Score
Advertisement

क्रिकेट में जम्मू-कश्मीर के यह सुनहरे भविष्य की महज शुरुआत है और रणजी ट्रॉफी में मिली यह कामयाबी टीम के खिलाड़ियों को दमदार प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करेगी।

Article Source: IANS

लेखक के बारे में

IANS News
IANS is one of the largest independent private Indian news agency in India. Founded in the year 1986 by Indian American publisher Gopal Raju as the "India Abroad News Service" and later renamed. Their main offices are located in Noida, Uttar Pradesh. Read More
ताजा क्रिकेट समाचार