Cricket Tales - गुरु गुप्ते का निधन हो गया- वे 66 साल के थे। मुंबई और रेलवे के लिए खेले थे 1974-75 से 1980-81 के बीच (इसमें 1980-81 सीज़न में मुंबई और उससे पहले 1974-75 और 1975-76 में रेलवे) और सिर्फ 12 फर्स्ट क्लास मैच जिनमें 24.26 औसत पर 461 रन बनाए।

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मुंबई के लिए भी इसलिए खेल पाए क्योंकि 1980-81 में मुंबई के कई स्टार खिलाड़ी भारतीय टीम के साथ ऑस्ट्रेलिया टूर पर थे। उस सीजन के सेमीफाइनल में तमिलनाडु के विरुद्ध दूसरी पारी में 170 रन बनाए- उस गेंदबाजी पर जिसमें महान ऑफ स्पिनर एस वेंकटराघवन और एल शिवरामकृष्णन भी थे। इस दौरान 291 रन की एक पार्टनरशिप की- गुलाम पार्कर के साथ। फाइनल में दिल्ली पर जीत के दौरान मुंबई की एकमात्र पारी में 18 रन बनाए और फिर कभी रणजी ट्रॉफी कैप नहीं पहनी। सभी कुछ साधारण सा है- शायद इसीलिए उनके निधन की खबर मुंबई से बाहर की अखबारों में भी नहीं छपी।

उनके क्रिकेट करियर की बात करते हुए स्कूली क्रिकेट का जिक्र जरूरी है। दिलीप वेंगसरकर उस समय से दोस्त और स्कूल के साथी थे- किंग जॉर्ज स्कूल में। इस स्कूल ने 1972 में जाइल्स शील्ड फाइनल में सेंट मैरी को हराया था। वेंगसरकर ने एक बार उनके जिक्र में उन्हें एक बेहतरीन बल्लेबाज, टीम मैन और बहुत अच्छा फील्डर गिना था। वे 1973 में यूके गई इंडियन स्कूल बॉयज़ टीम में भी थे।

दिलीप, संदीप (पाटिल) और गुरु को उन दिनों में मुंबई क्रिकेट में स्कूली स्टार गिना जाता था। दिलीप और संदीप, मुंबई और भारत के लिए खेले- शायद गुरु का मुंबई छोड़कर रेलवे के लिए खेलना उनके करियर की लाइन बदलने वाला साबित हो गया। उनके पुराने साथी क्रिकेटर हैरान होते थे कि वे टेस्ट नहीं खेल पाए।

तो इस 66 साल के क्रिकेटर से जुड़ी ऐसी क्या ख़ास बात है कि उनका जिक्र यहां कर रहे हैं। विश्वास कीजिए उनके नाम के साथ एक ऐसा किस्सा जुड़ा है जिसकी भारतीय क्रिकेट इतिहास में कोई मिसाल नहीं। ऐसा किस्सा जिसका कहीं जिक्र तक नहीं किया जाता क्योंकि जो हुआ वह सोचते भी नहीं।

इसे जानने के लिए 1973 में चलते हैं जब भारत की स्कूली क्रिकेट टीम ने यूके का टूर किया। उस टीम के मैनेजर थे बल्लेबाजी के दिग्गज और भारत के टेस्ट क्रिकेटर विजय मांजरेकर- तब कोच नहीं, मैनेजर टीम के सबसे बड़े ऑफिशियल होते थे।

ये घटना उसी टूर की है। एक टूर मैच के दौरान, फील्डिंग में गुरु से एक गलती हुई और ओवर थ्रो के रन बन गए। इस पर मैनेजर विजय मांजरेकर को इतना गुस्सा आया कि जब टीम ग्राउंड से लौटी तो सभी के सामने न सिर्फ गुरु को डांटा, थप्पड़ भी मार दिया। सन्नाटा छा गया वहां- ओवर थ्रो पर रन बनने पर क्रिकेटर को थप्पड़ मार दिया!

उस समय, आज की तरह मैचों की रिपोर्टिंग नहीं होती थी और वह भी स्कूल क्रिकेट का मैच- इसलिए इस खबर को दबाने में देर नहीं लगी। संयोग से युवा क्रिकेट रिपोर्टर राजन बाला (जो बाद में देश के सबसे बेहतर क्रिकेट रिपोर्टर में से एक गिने गए) उस टीम के साथ टूर कर रहे थे। वे वहीं थे और थप्पड़ को भी देखा। उन्हें तो सनसनीखेज स्टोरी मिल गई और उन्होंने इसकी खबर छपवा दी। देश में हंगामा हो गया। इस किस्से के जग जाहिर होने से विजय मांजरेकर को बड़ा नुक्सान हुआ और बीसीसीआई ने उसके बाद उन्हें कोई ड्यूटी नहीं दी।

अब विजय मांजरेकर के निशाने पर थे राजन बाला क्योंकि जिस खबर को दबा दिया था- वह उन्हीं की वजह से छप गई और इससे रिटायर होने के बाद के उनके करियर को बड़ा नुक्सान हुआ। राजन बाला तब बंगलोर के एक अखबार के लिए काम करते थे। विजय मांजरेकर भूले नहीं राजन बाला को।

एक बार फिर से दोनों का आमना-सामना हो गया। विजय मांजरेकर ने पहले तो अपने दिल की भड़ास निकाली और उसके बाद तो हद ही हो गई- उन्होंने वहीं राजन बाला को थप्पड़ मार दिया। आपने ऐसा कोई किस्सा नहीं सुना होगा।

आने वाले सालों में राजन बाला देश के सबसे बेहतर क्रिकेट रिपोर्टर में से एक बने। कई पुराने क्रिकेटरों की ऑटोबायोग्राफी के वास्तविक लेखक वे थे। क्रिकेटर भी उनकी इज्जत करते थे और राजन बाला की सबसे बड़ी खूबी ये थी कि सही रिपोर्टिंग को नहीं छोड़ा और क्रिकेटरों को सही सलाह भी दी।

क्या इसे एक संयोग नहीं कहेंगे कि जब राजन बाला की आखिरी किताब Days Well Spent-A Cricketing Odyssey (जिसे उनकी ऑटोबायोग्राफी भी कहते हैं) को रिलीज किया गया मुंबई के ब्रेबॉर्न स्टेडियम में क्रिकेट क्लब ऑफ़ इंडिया में तो उस प्रोग्राम के चीफ गेस्ट और कोई नहीं, उन विजय मांजरेकर के बेटे संजय मांजरेकर थे।

गुरु गुप्ते से जुड़ा एक और किस्सा भी है पर वह एक अलग स्टोरी है।

लेखक के बारे में

Charanpal Singh Sobti
Charanpal Singh Sobti is a veteran cricket writer with more than five decades of experience covering the game. At Cricketnmore, he brings his extensive knowledge, unique perspective and deep understanding of cricket to readers through insightful news, analysis, historical pieces and fascinating stories from the world of cricket. Read More
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