इंग्लैंड के दूसरे सबसे बड़ी उम्र के टेस्ट क्रिकेटर (मिकी स्टीवर्ट के बाद) और भूतपूर्व कप्तान माइक स्मिथ, जो MJK के नाम से ज्यादा मशहूर थे, का 92 साल की उम्र में निधन हो गया है।

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कुल 50 टेस्ट खेले और उनमें से 25 में इंग्लैंड के कप्तान रहे हालांकि सिर्फ 5 जीते, पर हारे भी सिर्फ 3 ही। ऐसे लोकप्रिय कप्तान थे कि दूसरी टीमों के खिलाड़ी भी उन्हें प्यार करते थे, उनकी इज्जत करते थे।

तब हेलमेट नहीं थे पर वे शॉर्ट लेग पर फील्डिंग करने में कभी नहीं हिचकिचाए। एक रिकॉर्ड तो उनके नाम ऐसा है जिसके बारे में अब सोचते भी नहीं। वह इंग्लैंड के लिए क्रिकेट और रग्बी यूनियन (1956 में वेल्स के विरुद्ध) इंटरनेशनल, दोनों खेलने वाले आखिरी खिलाड़ी थे।

जैसा उनका रिकॉर्ड है, वे वास्तव में उस से कहीं बेहतर बल्लेबाज थे। टेस्ट में 31 की औसत से 2,278 रन सिर्फ़ तीन सेंचुरी के साथ पर चार बार, नर्वस नाइंटीज (99,99,98 और 96) में आउट हुए। विजडन अल्मनैक में, फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में 25,000 से ज्यादा रन बनाने वालों की लिस्ट में उनका भी नाम है। कुल 69 शतक के साथ 637 मैच में 39,832 रन (18वां सबसे बड़ा स्कोर) बनाए जिनमें से ज्यादातर वारविकशायर के लिए थे।

1959 में, सिर्फ 26 साल की उम्र में एमजेके ने फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में 3,245 रन बनाए और एक इंग्लिश समर में 3,000 से ज़्यादा रन बनाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी थे। असल में, पिछले 10 साल में 3,000 पार करने वाले पहले खिलाड़ी थे। उस समर में, अपना पहला टेस्ट 100 (ओल्ड ट्रैफर्ड में भारत के विरुद्ध) भी बनाया और द ओवल में 98 रन पर आउट हो गए तथा एक और 100 बनाने से चूक गए। विजडन ने तब उन्हें अपने पांच क्रिकेटरों में से एक नामित किया था।

1963-64 के भारत टूर पर आई इंग्लैंड टीम के वे कप्तान थे (इस सीरीज में भारत 5 में से कोई टेस्ट न हारा था) और वेस्टइंडीज के विरुद्ध 1966 की घरेलू सीरीज के पहले टेस्ट तक कप्तान रहे। कुल मिलाकर, जानकारों ने उनकी कप्तानी को हमेशा निष्पक्ष और बिना स्वार्थ वाली गिना। अब इंग्लैंड के सबसे बुजुर्ग जीवित कप्तान टोनी लुईस हैं।

1968 में रिटायर हो गए थे लेकिन 1972 की एशेज में तीन टेस्ट के लिए वापस लौटे और बॉब मेसी टेस्ट के तौर पर मशहूर लॉर्ड्स टेस्ट में दूसरी पारी में 30 रन के साथ टॉप स्कोरर थे। बाद में टेस्ट टूर के लिए इंग्लैंड टीम के मैनेजर के रोल में भी बड़े लोकप्रिय रहे। क्रिकेट में योगदान के लिए 1976 में उन्हें OBE से सम्मानित किया था।

इसके बाद आईसीसी मैच रेफरी बने (4 टेस्ट और 17 वनडे में) और सबसे ख़ास बात ये कि आईसीसी के पहले मैच रेफरी थे (1991-92 की ऑस्ट्रेलिया-भारत सीरीज में)। 1991 से 2003 तक वारविकशायर के प्रेसिडेंट रहे। ये इस क्लब का स्वर्णिम दौर गिनते हैं जिसमें 7 बड़ी ट्रॉफी जीते, 1994 और 1995 में लगातार काउंटी चैंपियनशिप टाइटल सहित।

1964 के भारत टूर की बात करें तो असल में टेड डेक्सटर के टूर पर आने से इनकार के बाद, स्मिथ को कप्तान बनाया था। ये बड़ी चुनौती भरा टूर रहा, ख़ास तौर पर खिलाड़ियों के चोटिल होने और बीमारी की वजह से। तब भी वे सीरीज ड्रॉ कर गए, इसे भी स्मिथ के लिए एक जीत जैसा ही माना था और उस पर टेस्ट सीरीज में 51 का औसत भी दर्ज किया। इंग्लैंड टीम, बिना किसी विवाद वाली सीरीज खेलकर लौटी।

2019 में, ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध पहले टेस्ट के दौरान, एजबेस्टन में उनके सम्मान में वारविकशायर ने स्टेडियम के एक गेट को उनका नाम दिया।

अक्सर ही ब्रायन लारा को वारविकशायर के लिए खेलने के लिए इंग्लैंड लाने का श्रेय उन्हें दिया जाता है। 1994 में कैरिबियन टूर पर वे इंग्लैंड टीम के मैनेजर थे और तब उन्हें युवा ब्रायन लारा के टैलेंट को बड़े नजदीक से देखने का मौका मिला। उन्होंने फौरन ही वारविकशायर को लारा को अपने विदेशी क्रिकेटर का कॉन्ट्रैक्ट देने की सलाह दी। उसके कुछ दिन बाद ही लारा ने सीरीज के एंटीगा टेस्ट में गैरी सोबर्स के 365* के सबसे बड़े टेस्ट स्कोर के रिकॉर्ड को तोड़ दिया था।

काउंटी क्लब ऑफिस ने बिना देरी लारा का वर्क परमिट, स्मिथ को भेज दिया। सब तय हो गया पर विश्वास कीजिए एक बार तो ऐसा लगा था कि लारा वारविकशायर के लिए खेलने के लिए इंग्लैंड नहीं जा पाएंगे। असल में हुआ ये कि स्मिथ से लारा का वर्क परमिट खो गया। ये तो अच्छा हुआ कि किस्मत से ये स्मिथ के पजामे में लिपटा मिल गया और लारा जा पाए। क्या गजब का साबित हुआ ये फैसला और 1994 में, ब्रायन लारा के साथ वारविकशायर ने सीजन के चार में से तीन टूर्नामेंट जीते और चौथे के फाइनल में हार गए थे।

1958 में हेडिंग्ले में न्यूजीलैंड के विरुद्ध तीसरे टेस्ट में, एक बड़ा अजीब नजारा देखने को मिला। असल में इंग्लैंड की पारी की शुरुआत की, रग्बी इंटरनेशनल खिलाड़ी माइक स्मिथ और फुटबॉल इंटरनेशनल खिलाड़ी आर्थर मिल्टन ने।

2023 में, एमजेके स्मिथ को उनका 90वां जन्मदिन मनाने और अपनी टीम बेयर्स को वाइटैलिटी ब्लास्ट के मैच में खेलते (डरहम के विरुद्ध नॉर्थ ग्रुप के फाइनल में) देखने के लिए एजबेस्टन आमंत्रित किया गया था। स्मिथ, जो रिकॉर्ड 327 मैच में वारविकशायर के कप्तान रहे, गेस्ट ऑफ ऑनर थे और दोस्तों और परिवार के साथ अपना खास जन्मदिन मनाया।

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उनकी विरासत को उनके बेटे, ऑफ-स्पिनिंग ऑल-राउंडर नील (एनएमके) ने आगे बढ़ाया। वे इंग्लैंड के लिए वनडे (एक वर्ल्ड कप सहित) खेले पर एमजेके के लिए सबसे यादगार पल वह था जब नील वारविकशायर के कप्तान बने और इस काउंटी के इतिहास में पहली बार पिता और बेटे दोनों के काउंटी टीम की कप्तानी का रिकॉर्ड बना। स्मिथ की बेटी कैरोल ने, इंग्लिश के सबसे मशहूर मिडिल-डिस्टेंस रनर में से एक और मेंबर ऑफ़ पार्लियामेंट सेबेस्टियन को से शादी की।

लेखक के बारे में

Charanpal Singh Sobti
Charanpal Singh Sobti is a veteran cricket writer with more than five decades of experience covering the game. At Cricketnmore, he brings his extensive knowledge, unique perspective and deep understanding of cricket to readers through insightful news, analysis, historical pieces and fascinating stories from the world of cricket. Read More
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