Asian Games: जापान के काकामिगाहारा में शुक्रवार को खेले गए फाइनल में चीन को 1-0 से हराकर महिला हॉकी टीम ने एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल का 44 साल का इंतजार खत्म किया। इसके बाद भारत की स्टार फॉरवर्ड खिलाड़ी दीपिका ने लॉस एंजिल्स में होने वाले ओलंपिक गेम्स 2028 के लिए क्वालिफिकेशन हासिल करने को गर्व का पल बताया।
लालरेम्सियामी ने फाइनल के 10वें मिनट में जबरदस्त रिवर्स हिट से एकमात्र गोल किया, जबकि कप्तान सविता पूनिया ने एक अहम पेनल्टी-स्ट्रोक बचाया। भारत ने चीन के लगातार दबाव का सामना करते हुए 1982 के बाद पहली बार कॉन्टिनेंटल टाइटल अपने नाम किया। जीत के बाद दीपिका ने 'आईएएनएस' से कहा, "बेशक, हमें लॉस एंजिल्स का टिकट मिल गया है। यह गर्व का पल है। इतने वर्षों बाद मुझे मेडल मिला है। मुझे लॉस एंजिल्स जाना है और मेडल के बारे में सोचना है। हमारे पास पोडियम तक पहुंचने के लिए काफी समय है। हम निश्चित रूप से उस पर कड़ी मेहनत कर सकते हैं।"
ओलंपिक क्वालिफिकेशन ने दीपिका के लिए इस यादगार टूर्नामेंट को और भी खास बना दिया, क्योंकि वह 21 गोल के साथ टूर्नामेंट की सबसे ज्यादा गोल करने वाली खिलाड़ी रहीं। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने किसी खास मैच को सबसे मुश्किल चुनौती माना, तो दीपिका ने कहा कि टीम ने विरोधी टीम की चिंता करने के बजाय अपने प्रदर्शन पर ध्यान दिया। बेशक, चुनौतियां बहुत थीं। मगर हमें खुद पर ध्यान देना था। यही हमारी सबसे बड़ी बात थी। मुझे पता है कि हमसे आगे वर्ल्ड रैंकिंग वाली टीम है। चीन एक अच्छी टीम है, लेकिन हमें उनसे ज्यादा तैयार रहना होगा। मुझे लगता है कि पूरी टीम ने अच्छा प्रदर्शन किया।"
भारत की तैयारियों में उस दिन के अनुकूल हालात का भी फायदा मिला, लेकिन दीपिका को लगा कि सबसे बड़ा फर्क टीम की सोच से आया। उन्होंने कहा, "बेशक, मौसम अच्छा था, लेकिन आज टीम की सोच अलग थी।" जब भारत ने पेनल्टी-स्ट्रोक दिया तो चीन बराबरी करने के करीब पहुंच गया था, लेकिन सविता ने शानदार तरीके से एक हाथ से उसे बचा लिया।
दीपिका ने कहा कि उस पल ने टीम की एनर्जी बदल दी और आगे बढ़ते रहने का उनका हौसला और मजबूत किया। उन्होंने कहा, "हां, जब उन्हें स्ट्रोक मिला तो हमें लगा कि वह गोल कर लेंगे। सबके मन में यही बात थी। मगर जब सविता ने उस गोल को बचाया तो टीम में एक अलग तरह का जोश आ गया। अब हमें अगले गोल के लिए कोशिश करनी थी।"
यह गोल्ड मेडल भारत के लिए बहुत खास था, क्योंकि भारत ने आखिरी बार 1982 में नई दिल्ली में हुए एशियन गेम्स में महिला हॉकी का खिताब जीता था, जब इस खेल को पहली बार इन एशियन गेम्स में शामिल किया गया था। इसके बाद भारत 1998 और 2018 में फाइनल तक पहुंचा, लेकिन दोनों बार उसे सिल्वर मेडल से ही संतोष करना पड़ा।
दीपिका का टॉप तक पहुंचने का सफर एक ऐसे स्पोर्ट्स बैकग्राउंड से तय हुआ, जिसने शुरुआत में उन्हें रेसलिंग की ओर प्रेरित किया था। हरियाणा के हिसार में जन्मीं दीपिका एक ऐसे परिवार में पली-बढ़ीं जो खेलों से जुड़ा था और वह अक्सर अपने पिता और बड़े भाई के साथ रेसलिंग सेंटर जाती थीं।
यह गोल्ड मेडल भारत के लिए बहुत खास था, क्योंकि भारत ने आखिरी बार 1982 में नई दिल्ली में हुए एशियन गेम्स में महिला हॉकी का खिताब जीता था, जब इस खेल को पहली बार इन एशियन गेम्स में शामिल किया गया था। इसके बाद भारत 1998 और 2018 में फाइनल तक पहुंचा, लेकिन दोनों बार उसे सिल्वर मेडल से ही संतोष करना पड़ा।
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Article Source: IANS