भारत के सावन बरवाल ने एशियन गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुष मैराथन में सिल्वर मेडल जीता। बरवाल के सिल्वर ने इवेंट में देश के मेडल जीतने का 44 साल का इंतजार समाप्त किया। बरवाल को उनकी उपलब्धि पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने बधाई दी है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर लिखा, "एशियन गेम्स 2026 में पुरुषों की मैराथन में सिल्वर मेडल जीतने पर सावन बरवाल को मेरी तरफ से बहुत-बहुत बधाई। आपके शानदार प्रदर्शन ने चार दशकों के बाद एशियन गेम्स मैराथन पोडियम पर भारत की वापसी को चिह्नित किया है। यह शानदार उपलब्धि लंबी दूरी के धावकों की नई पीढ़ी को प्रेरित करे।"
खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने एक्स पर बरवाल की जीत का वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, "भारत के लिए ऐतिहासिक सिल्वर। एशियन गेम्स मैराथन मेडल के लिए भारत का 44 साल का इंतजार खत्म करने पर सावन बरवाल को बधाई। उन्होंने पुरुषों की मैराथन में शानदार 2:11:37 का समय निकालकर नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया। पूरे देश को इस ऐतिहासिक कामयाबी पर बहुत गर्व है।"
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर लिखा, "एशियन गेम्स 2026 में पुरुषों की मैराथन में सिल्वर मेडल जीतने पर सावन बरवाल को मेरी तरफ से बहुत-बहुत बधाई। आपके शानदार प्रदर्शन ने चार दशकों के बाद एशियन गेम्स मैराथन पोडियम पर भारत की वापसी को चिह्नित किया है। यह शानदार उपलब्धि लंबी दूरी के धावकों की नई पीढ़ी को प्रेरित करे।"
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बरवाल की इस कामयाबी से भारत के ऐतिहासिक एशियन गेम्स मैराथन मेडल की गिनती में चौथा मेडल जुड़ गया है। उनसे पहले छोटा सिंह ने 1951 के एशियन गेम्स में गोल्ड जीता था, जबकि सूरत सिंह माथुर ने उसी एडिशन में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। होसुर कुक्कप्पा सीतारण ने 1982 एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया था। बरवाल ने 1982 के बाद पहली बार देश को मैराथन में पदक दिलवाया है।