भारतीय महिला कबड्डी टीम ने युगांडा को हराकर ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का स्वर्ण पदक जीता था। हरियाणा के जींद की रहने वाली साक्षी शर्मा स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम की सदस्य थीं। साक्षी की सफलता पर उनके घर और गांव में जश्न का माहौल है।
साक्षी शर्मा की दादी मुर्ती देवी ने आईएएनएस से कहा, "मैं बहुत खुश हूं। मेरी पोती का बचपन से सपना था कि वो कबड्डी खेले। हम लोगों ने मैच देखा। बहुत अच्छा लगा। सारे गांव ने मैच देखा, सभी का कहना था कि लड़की ने पूरे गांव का नाम रोशन कर दिया। उसे और आगे जाना चाहिए। वो मेरे बड़े बेटे की लड़की है। परिवार में दो बहन एक भाई है।"
उन्होंने कहा, "उसे सबकुछ खाना पसंद है। मैं अपनी पोती के लौटने पर दूध-दही के साथ जोरदार स्वागत करूंगी। वह 12 साल से खेल रही है। उस समय सातवीं क्लास में पढ़ रही थी।"
साक्षी की मां कविता देवी ने आईएएनएस से कहा, "मुझे बड़ी खुशी हुई। गांव में बड़ी स्क्रीन लगी हुई थी और पूरा गांव एक साथ बैठकर मुकाबला देख रहा था। सभी खुश हैं कि बेटी देश के लिए मेडल लाई है। उसने गांव का और देश का नाम रोशन किया। ऐसी बेटी को सभी जन्म दें। बेटियां बेटों से कम नहीं हैं। ऐसी बेटी भगवान सबको दे। उसे चुरमा खिलाकर भेजा था। बेटी को दुध, घी और चुरमा पसंद है।"
उन्होंने कहा, "उसका शुरू से ही कबड्डी में मन लगता था और वह इसी खेल में आगे बढ़ना चाहती थी। मैं चाहती हूं कि बेटी ओलंपिक स्तर पर जाए। यह सिर्फ मेरा नहीं, बल्कि पूरे गांव का सपना है। उसे गांव, घर सबका सहयोग मिला है। उसके आने पर लड्डू बाटेंगे। उसका जो मन होगा, वही खाना बनाएंगे।"
साक्षी की मां कविता देवी ने आईएएनएस से कहा, "मुझे बड़ी खुशी हुई। गांव में बड़ी स्क्रीन लगी हुई थी और पूरा गांव एक साथ बैठकर मुकाबला देख रहा था। सभी खुश हैं कि बेटी देश के लिए मेडल लाई है। उसने गांव का और देश का नाम रोशन किया। ऐसी बेटी को सभी जन्म दें। बेटियां बेटों से कम नहीं हैं। ऐसी बेटी भगवान सबको दे। उसे चुरमा खिलाकर भेजा था। बेटी को दुध, घी और चुरमा पसंद है।"
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Article Source: IANS