भारतीय पहलवान दीपक पूनिया ने अपने दमखम से पूरी दुनिया में नाम रोशन किया है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2020 में देश का प्रतिनिधित्व कर चुके रेसलर दीपक की कहानी बेहद प्रेरणादायी रही है।

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19 मई 1999 को हरियाणा के झज्जर के छारा कस्बे में जन्मे दीपक पूनिया कुश्ती के ही माहौल में पले-बढ़े। पिता सुभाष खुद एक पहलवान रह चुके थे, जिनसे नन्हे दीपक को प्रेरणा मिली।

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पिता ही दीपक के पहले गुरु थे। महज 5 साल की उम्र में पिता ने दीपक को अखाड़े में दाखिला दिलाया। दूध पीने के शौकीन दीपक ने अपनी ताकत से सभी को चौंकाया। दंगल में उन्होंने कई बार नकद पुरस्कार भी जीते।

स्कूल स्तरीय मीट के दौरान छत्रसाल स्टेडियम के एक कोच ने दीपक की प्रतिभा को पहचाना। हालांकि, मिट्टी पर कुश्ती लड़ने वाले दीपक के लिए सिंथेटिक मैट पर दांव लगाना बेहद मुश्किल था, लेकिन उन्होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।

साल 2016 में दीपक ने जूनियर एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड अपने नाम किया, जिसके बाद वर्ल्ड कैडेट चैंपियनशिप में एक और गोल्ड जीता।

एशियन जूनियर चैंपियनशिप 2018 में दीपक ने एक बार फिर गोल्ड अपन नाम किया और वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप 2018 में सिल्वर जीतकर अपनी शानदार छाप छोड़ी। साल 2019 में दीपक पूनिया ने जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप जीती। दीपक साल 2001 के बाद इस खिताब को जीतने वाले पहले भारतीय थे।

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दीपक पूनिया 2020 टोक्यो ओलंपिक में पुरुष 86 किलोग्राम वर्ग के कांस्य पदक मैच तक पहुंचे, जहां सैन मैरिनो के माइल्स अमीन से हार का सामना करना पड़ा। दीपक पूनिया को अप्रैल 2024 में बिश्केक (किर्गिस्तान) में आयोजित एशियन ओलंपिक क्वालीफायर से बाहर कर दिया गया था, क्योंकि वह दुबई में भारी बारिश के कारण फ्लाइट में देरी होने के कारण समय पर 'वेट-इन' के लिए रिपोर्ट नहीं कर पाए थे। दीपक ने मई 2024 में वर्ल्ड क्वालीफाइंग टूर्नामेंट के जरिए ओलंपिक टिकट पाने की कोशिश की, लेकिन इसमें सफल नहीं रह सके।

एशियन जूनियर चैंपियनशिप 2018 में दीपक ने एक बार फिर गोल्ड अपन नाम किया और वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप 2018 में सिल्वर जीतकर अपनी शानदार छाप छोड़ी। साल 2019 में दीपक पूनिया ने जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप जीती। दीपक साल 2001 के बाद इस खिताब को जीतने वाले पहले भारतीय थे।

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साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर मेहनत, अनुशासन और संघर्ष के दम पर विश्व स्तर पर पहचान बनाने वाले दीपक पूनिया सैकड़ों भारतीय युवाओं के लिए रोल मॉडल हैं। जूनियर वर्ल्ड चैंपियन बनने से लेकर विश्व चैंपियनशिप और कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल जीतकर उन्होंने साबित किया कि समर्पण और आत्मविश्वास से हर सपना साकार किया जा सकता है।

Article Source: IANS
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