तीरंदाजी भारत की एक पारंपरिक कला है। प्राचीन काल में शत्रु पर विजय पाने के लिए लोग इसमें दक्षता हासिल करते थे। आधुनिक युग में तीरंदाजी एक सम्मानित खेल के रूप में जानी जाती है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खेली जाती है। भारत के जिन तीरंदाजों ने वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है और देश का नाम रोशन किया है उनमें जयंता तालुकदार का नाम अहम है।
जयंता तालुकदार का जन्म 2 मार्च, 1986 को गुवाहाटी, असम में हुआ था। असम एक जनजाति बहुल प्रदेश है। तीरंदाजी असम में बेहद लोकप्रिय है। इसका असर जयंता पर भी पड़ा और बेहद कम उम्र में ही उन्होंने इस खेल में रुचि लेना शुरू कर दिया। अपनी मेहनत और कुशलता के दम पर जल्द ही उन्होंने इस क्षेत्र में सिद्धता हासिल की और बड़ी सफलता प्राप्त की।
तालुकदार 2004 जूनियर विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे। 2006 में उन्होंने एफआईटीए मेटेकसन विश्व कप में स्वर्ण पदक जीता। इस इवेंट में स्वर्ण जीतने वाले वह पहले भारतीय तीरंदाज थे। 2006 में उन्होंने साउथ एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक और 2006 एशियन गेम्स में टीम कॉम्पिटिशन में कांस्य पदक भी जीता।
जयंता तालुकदार का जन्म 2 मार्च, 1986 को गुवाहाटी, असम में हुआ था। असम एक जनजाति बहुल प्रदेश है। तीरंदाजी असम में बेहद लोकप्रिय है। इसका असर जयंता पर भी पड़ा और बेहद कम उम्र में ही उन्होंने इस खेल में रुचि लेना शुरू कर दिया। अपनी मेहनत और कुशलता के दम पर जल्द ही उन्होंने इस क्षेत्र में सिद्धता हासिल की और बड़ी सफलता प्राप्त की।
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भारत में तीरंदाजी को लोकप्रिय बनाने और इस खेल में देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में जयंता तालुकदार का बड़ा योगदान रहा है। भारत सरकार ने 2007 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया था। असम सरकार ने तालुकदार ने उन्हें पुलिस उप अधीक्षक के रूप में नियुक्त किया है।