भारतीय महिला रेसलर मनीषा भनवाला ने इतिहास रच दिया है। उन्होंने कजाकिस्तान के अस्ताना में शुक्रवार को आयोजित सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के महिला 59 किग्रा फाइनल में अमेरिका की एबिगेल नेट के खिलाफ शानदार वापसी करते हुए जीत हासिल की और देश के लिए पहला स्वर्ण पदक जीता।
अस्ताना में चल रही इस वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में भारत को अपना पहला स्वर्ण पदक मिला है। इससे पहले दो मौकों पर भारतीय खिलाड़ी स्वर्ण पदक जीतने से चूक गई थीं। मनीषा ने बेहद रोमांचक अंदाज में यह ऐतिहासिक जीत हासिल की। फाइनल में वह नेट के खिलाफ 6-0 से पिछड़ रही थीं, लेकिन उन्होंने शानदार वापसी करते हुए 8-6 से मुकाबला जीता और स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (यूडब्ल्यूडब्ल्यू) से मिली जानकारी के अनुसार, इस वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में इससे पहले 50 किग्रा वर्ग में नीलम और 76 किग्रा वर्ग में काजल ने विश्व चैंपियन बनने का प्रयास किया था, लेकिन दोनों ही फाइनल में हार गई थीं। महिला 59 किग्रा फाइनल में नेट ने मनीषा को गिराकर चार अंक हासिल किए। भारत ने इस फैसले को चुनौती दी, लेकिन चुनौती असफल रही और अमेरिकी रेसलर को एक और अंक मिल गया, जिससे वह 5-0 से आगे हो गईं। इसके बाद मनीषा को एक चेतावनी मिलने से नेट की बढ़त 6-0 हो गई। ब्रेक से ठीक पहले, मनीषा ने नेट को मैट से बाहर (स्टेप-आउट) धकेलकर एक अंक हासिल किया और अंतर को थोड़ा कम किया।
इसके बाद मनीषा ने शानदार वापसी की। उन्होंने नेट को 'टेकडाउन' किया, जिस पर अमेरिकी टीम ने यह कहते हुए चुनौती दी कि रेफरी ने मुकाबला रोकने के लिए सीटी बजा दी थी। उनकी चुनौती खारिज हो गई, जिससे मनीषा को एक और अंक मिला और उन्हें 'पार टेरे' (जमीन पर कुश्ती की स्थिति) में फायदा मिला।
6-4 के स्कोर पर मनीषा ने 'गट-रिंच' तकनीक का इस्तेमाल करते हुए नेट को पलटा और दो अंक हासिल किए। उन्होंने नेट को पूरी तरह से दबाकर 'फॉल' (जीत) हासिल करने की कोशिश की, लेकिन इसमें सफल नहीं हो सकीं। नेट ने अपनी 6-6 की बढ़त (क्राइटेरिया के आधार पर) को बचाने की कोशिश की, लेकिन मनीषा ने दबाव बनाते हुए एक और 'टेकडाउन' किया और 8-6 की बढ़त बना ली। अंत तक उन्होंने अपनी इस बढ़त को बरकरार रखा और एक ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीत लिया।
इसके बाद मनीषा ने शानदार वापसी की। उन्होंने नेट को 'टेकडाउन' किया, जिस पर अमेरिकी टीम ने यह कहते हुए चुनौती दी कि रेफरी ने मुकाबला रोकने के लिए सीटी बजा दी थी। उनकी चुनौती खारिज हो गई, जिससे मनीषा को एक और अंक मिला और उन्हें 'पार टेरे' (जमीन पर कुश्ती की स्थिति) में फायदा मिला।
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Article Source: IANS