Asian Games: एशियन गेम्स 2026 में सोमवार को विथ्या रामराज ने महिलाओं की 400 मीटर हर्डल्स स्पर्धा के फाइनल में 54.75 सेकंड के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। इसी के साथ विथ्या ने दिग्गज भारतीय एथलीट पीटी उषा के 42 साल पुराने नेशनल रिकॉर्ड को तोड़ दिया।

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विथ्या ने यह मेडल जुड़वां बहन को समर्पित करते हुए सरकार और संगठनों का भी आभार जताया, जिन्होंने उनके सफर में मदद की। इसके साथ ही उन्होंने पिता से मिले समर्थन को भी याद किया, जिन्होंने समाज के ताने सुनते हुए और आर्थिक संकट से जूझकर देश का नाम रोशन किया।

सोमवार को ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद विथ्या ने 'आईएएनएस' से ​​कहा, "मैं यह मेडल अपनी जुड़वां बहन को समर्पित करती हूं, क्योंकि वह हमेशा मेरे साथ रहती हैं। वह हमेशा मेरा साथ देती हैं। जब भी मैं उससे कुछ मांगती हूं, वह मुझे भेज देती हैं। मैं खुश हूं।"

विथ्या ने टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स), अपनी राज्य सरकार, जेएसडब्ल्यू और इंडियन रेलवे (जहां वह काम करती हैं) से मिले सहयोग को याद करते हुए कहा, "टॉप्स मुझे बहुत सपोर्ट कर रहा है, और मेरी राज्य सरकार भी मुझे बहुत सपोर्ट कर रही है। जेएसडब्ल्यू और इंडियन रेलवे भी मुझे बहुत सपोर्ट कर रहे हैं। मैं इंडियन रेलवे में काम करती हूं। इसी वजह से मैं यहां आ पाई और अब मैं बहुत खुश हूं। आजकल मुझे किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है, इसलिए मैं खुश हूं।"

विथ्या को यह सफलता परिवार के कई वर्षों के संघर्ष के बाद मिली है। विथ्या ने चुनौतियों को याद करते हुए बताया कि उनका परिवार किराए के घर में रहता था और पिता को अपनी तीन बेटियों के भविष्य को लेकर लोगों के सवालों का सामना करना पड़ता था।

उन्होंने कहा, "पहले हम किराए के घर में रहते थे। जब हम बड़े हो रहे थे, तो लोग कहते थे, 'बच्चे बड़े हो रहे हैं, अब तुम क्या करोगे?' यहां तक ​​कि मेरी दादी और पिता से भी कहा जाता था, 'तुम्हारी तीन बेटियां हैं, उनका क्या करोगे?'"

विथ्या के पिता ड्राइवर थे, जो बमुश्किल महीनेभर में 15,000 रुपये कमा पाते। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपनी बेटियों का साथ देना जारी रखा।

विथ्या ने बताया, "मेरे पिता ड्राइवर हैं। वह लगभग 15,000 रुपये कमाते थे, इसलिए हमारे पास ज्यादा पैसे नहीं होते थे। साल 2009 में भी जूतों की कीमत 2,000 से 5,000 रुपये तक होती थी। फिर भी उन्होंने हम पर वो पैसे खर्च किए। जब ​​मैं और मेरी जुड़वां बहन एक साथ दो खेल खेल रही थीं, तो हर चीज, ड्रेस, जूते और उपकरण पर बहुत खर्च आता था, लेकिन उन्होंने इसका इंतजाम किया। इसीलिए हम आज यहां हैं।"

28 वर्षीय विथ्या ने अपने कोच को भी इस उपलब्धि का श्रेय दिया, जिन्हें विश्वास था कि विथ्या 55 सेकंड का बैरियर तोड़ सकती हैं, जबकि खुद विथ्या को इसका भरोसा नहीं था। विथ्या ने कहा, "नहीं, मुझे विश्वास नहीं था। सिर्फ मेरे कोच को विश्वास था। मुझे अपने कोच पर भरोसा है, इसलिए वह जो भी कहते हैं, मैं करती हूं। मैं इतने वर्षों से वही कर रही हूं, जो उन्होंने मुझे करने के लिए कहा है। बस ऐसा ही हुआ।"

विथ्या ने 2023 में हांगझोऊ में इसी इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। वह नागोया के ट्रैक से खुश हैं। उन्होंने कहा, "यह ट्रैक बहुत ही बढ़िया है। मैंने सिंथेट और मोंडो ट्रैक देखे हैं, लेकिन यह ट्रैक थोड़ा अलग है। मुझे लगता है कि यह एक स्पीड ट्रैक है, इसलिए मैं इस ट्रैक से बहुत खुश हूं।"

28 वर्षीय विथ्या ने अपने कोच को भी इस उपलब्धि का श्रेय दिया, जिन्हें विश्वास था कि विथ्या 55 सेकंड का बैरियर तोड़ सकती हैं, जबकि खुद विथ्या को इसका भरोसा नहीं था। विथ्या ने कहा, "नहीं, मुझे विश्वास नहीं था। सिर्फ मेरे कोच को विश्वास था। मुझे अपने कोच पर भरोसा है, इसलिए वह जो भी कहते हैं, मैं करती हूं। मैं इतने वर्षों से वही कर रही हूं, जो उन्होंने मुझे करने के लिए कहा है। बस ऐसा ही हुआ।"

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Article Source: IANS

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