भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास में अंजुम चोपड़ा का योगदान बेहद अहम है। अंजुम ने न सिर्फ बल्ले से भारतीय टीम को कई मुकाबलों में यादगार जीत दिलाई, बल्कि उनकी कप्तानी में भी टीम इंडिया ने विदेशी सरजमीं पर पहली जीत दर्ज की थी। इतना ही नहीं, अंजुम के नेतृत्व में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने लड़कर जीतने का हुनर भी सीखा।
अंजुम चोपड़ा का जन्म 20 मई, 1977 को नई दिल्ली में हुआ। अंजुम का पूरा परिवार ही किसी ना किसी खेल से जुड़ा हुआ था, इसलिए उनकी लिए क्रिकेट के मैदान तक पहुंचने की राह इतनी मुश्किल नहीं रही। अंजुम के पिता एक गोल्फ खिलाड़ी थे, तो मां कार रैली में जीत दर्ज कर चुकी थीं। वहीं, उनके भाई अंडर-17 और अंडर-19 में दिल्ली की ओर से क्रिकेट खेल चुके थे। हालांकि, शुरुआत में अंजुम की रुचि क्रिकेट से ज्यादा बास्केटबॉल में थी, लेकिन क्रिकेट से जब एक बार नाता जुड़ा, तो वह फिर इस खेल में रमती चली गईं।
अंजुम ने भारतीय टीम के लिए अपना इंटरनेशनल डेब्यू साल 1995 में न्यूजीलैंड के खिलाफ किया था। 50 ओवर के फॉर्मेट में अंजुम बल्ले से लगातार छाप छोड़ने में सफल रहीं और 9 महीने बाद उन्हें भारत के लिए सफेद जर्सी में धमाल मचाने का मौका मिला। अंजुम ने मिले मौके को दोनों हाथों से भुनाया और भारत की ओर से वनडे क्रिकेट में शतक लगाने वाली पहली महिला क्रिकेटर बनीं। उन्होंने 1999 में इंग्लैंड के खिलाफ शतकीय पारी खेली।