तलवारबाजी एक पारंपरिक कला है। प्राचीन समय में तलवारबाजी का कौशल युद्ध क्षेत्र में शत्रु पर विजय प्राप्त करने के लिए हासिल किया जाता है। युद्ध का तरीका अब बदल चुका है। युद्ध अब तलवार नहीं, बल्कि रासायनिक हथियारों से लड़े जाते हैं। आधुनिक समय में तलवारबाजी एक खेल का रूप ले चुकी है। इस खेल में सीए भवानी देवी भारत का वैश्विक चेहरा हैं।
सीए भवानी देवी ने अपने तलवारबाजी कौशल का प्रदर्शन वैश्विक मंचों पर किया है और देश की इस परंपरागत कला को आधुनिक रूप में दुनिया के सामने प्रस्तुत किया है।
भवानी देवी का जन्म 27 अगस्त 1993 को चेन्नई में हुआ था। उनका पूरा नाम चदलवाड़ा आनंदा भवानी देवी है। भवानी ने 11 साल की उम्र में 2004 में तलवारबाजी शुरू की थी। दसवीं कक्षा पास करने के बाद वे थालास्सेरी, केरल के साई केंद्र पहुंची और यहीं तलवारबाजी के गुर सीखे। 14 साल की उम्र में वह तुर्की में अपने पहले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में शामिल हुई थीं। इसके बाद से भवानी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार इस खेल में सफलता की सीढ़ियां चढ़ती गईं।