भारत लंबे समय से खेलों की दुनिया में अपनी पहचान मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, जिसमें उसने काफी हद तक सफलता भी हासिल की है। ऐसे में ओलंपिक गेम्स 2036 की मेजबानी का दावा पेश करना देश के लिए एक बड़ा मौका है। हालांकि, ओलंपिक में भारत का अब तक का प्रदर्शन और दूसरे देशों की मजबूत दावेदारी इस राह में बड़ी चुनौतियां हैं, लेकिन कई ऐसे कारण हैं जो भारत को मजबूत दावेदार के रूप में पेश करते हैं।
सबसे पहले, बीते कुछ वर्षों में भारतीय खेलों का स्तर लगातार बेहतर हुआ है। सरकार की ओर से खेलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं देने पर ध्यान दिया गया है। टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स) और खेलो इंडिया जैसी योजनाओं ने भारतीय एथलीट्स को आगे बढ़ने का दिया है। एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय एथलीट्स की उपलब्धियां इस बदलाव को दिखाती हैं।
दूसरी तरफ, दुनिया में अब खेलों के बड़े आयोजनों की मेजबानी को केवल खेल तक सीमित नहीं देखा जाता। खासकर विकासशील देशों के लिए ऐसे आयोजन अपनी आर्थिक क्षमता, सांस्कृतिक पहचान और वैश्विक प्रभाव दिखाने का माध्यम बन गए हैं। ओलंपिक जैसे आयोजन से देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि मजबूत करने के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने का मौका मिलता है।