सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान मनीषा भनवाला ने अपने दिवंगत पिता, सुरेश भनवाला को इसका श्रेय दिया है। उन्होंने बताया कि उनके पिता ने ही उनके अंदर यह विश्वास जगाया था कि कोई भी काम तब तक शुरू नहीं करना चाहिए, जब तक कि उसे पूरा करने का पक्का इरादा न हो। मनीषा के अनुसार, जीवन की यह सीख अब उनके व्यक्तित्व का हिस्सा बन गई है और उनके कुश्ती करियर में हमेशा उनका मार्गदर्शन करती है।
कजाकिस्तान के अस्ताना में शुक्रवार को 59 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर मनीषा सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बन गईं। शनिवार को रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (डब्ल्यूएफआई) द्वारा आयोजित एक मीडिया बातचीत में मनीषा ने कहा, "मेरे पिता ने मुझे बचपन से ही एक बात सिखाई थी—अगर कोई काम शुरू करो, तो उसे पूरा करो। यह बात मेरे खून में बस गई है। अगर आप किसी काम को पूरा करने का इरादा नहीं रखते, तो उसे शुरू ही न करें। मेरे लिए कुश्ती ही पहला और आखिरी विकल्प है।"
23 वर्षीय पहलवान ने कहा कि उनके करियर में उनके पिता का अमूल्य योगदान रहा है और उनके निधन के बाद भी उनकी मौजूदगी उन्हें लगातार प्रेरित करती है। उन्होंने आगे कहा, "मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकती कि मेरे करियर में मेरे पिता का कितना बड़ा योगदान है। मैं अक्सर उनसे ऐसे बात करती हूं जैसे वह मेरे भीतर ही मौजूद हों। वह मेरे जीवन का हिस्सा हैं, मेरे दिल में बसते हैं। मेरे पिता ने मुझे सिखाया था कि या तो कोई काम शुरू ही मत करो, या फिर उसे पूरी तरह से खत्म करो। यह बात मेरे खून में है। कुश्ती मेरे लिए पहला और आखिरी विकल्प है। इसी ने मुझे जीवन दिया है, पहचान दी है और जीने का हौसला दिया है।"