भारतीय पहलवान मनीषा भनवाला ने बताया कि अपने कोचों के साथ मुश्किल मैचों की स्थितियों के लिए वर्षों तक की गई प्रैक्टिस ने उन्हें सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के फाइनल में 0-6 से पिछड़ने के बाद वापसी करने में मदद की। उन्होंने कजाकिस्तान के अस्ताना में महिलाओं के 59 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर ऐतिहासिक वापसी की।
सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं मनीषा ने कहा कि स्वर्ण पदक के मुकाबले में एबिगेल नेटो के खिलाफ 0-6 से पिछड़ने के बावजूद उन पर कोई मानसिक दबाव नहीं था, क्योंकि उन्होंने ऐसी चुनौतीपूर्ण स्थितियों के लिए पहले से ही लगातार ट्रेनिंग की थी।
मनीषा ने बताया कि ऐसी स्थितियों के लिए उनकी तैयारी, खासकर आखिरी कुछ सेकंड में अंक हासिल करने की उनकी क्षमता ने उन्हें मैच का पासा पलटने और ऐतिहासिक जीत हासिल करने में मदद की। रविवार को साई मीडिया द्वारा आयोजित एक बातचीत में मनीषा ने कहा, "जब हम प्रैक्टिस करते हैं, तो हमारे कोच हमें ऐसी स्थितियां देते हैं जहां हमें 30 सेकंड के अंदर अंक हासिल करने होते हैं। हम इसी पर प्रैक्टिस करते हैं। मैं लंबे समय से इसके लिए काम कर रही थी। मुझे ऐसी स्थितियों को संभालना था, इसलिए मैंने प्रैक्टिस की और इससे मदद मिली। वहां कोई मानसिक दबाव नहीं था।"