भारतीय कुश्ती ने पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपना दबदबा दिखाया है। भारतीय पहलवानों ने दुनिया के बड़े पहलवानों को हराते हुए ओलंपिक, कॉमनवेल्थ, एशियन गेम्स और वर्ल्ड चैंपियनशिप में पदक जीता है और देश की प्रतिष्ठा बढ़ाई है। योगेश्वर दत्त का नाम भी ऐसे ही पहलवानों में शुमार है।
ओलंपिक पदक विजेता योगेश्वर दत्त का जन्म 2 नवंबर 1982 को हरियाणा के सोनीपत के भैंसवाला कला में हुआ था। दत्त सोमवार को अपना 44वां जन्मदिन मनाएंगे। उनके परिवार के लोग शिक्षा से जुड़े रहे हैं, लेकिन उन्होंने कुश्ती के क्षेत्र में करियर बनाने का फैसला किया। योगेश्वर को इस फैसले में उनके पिता का भी सहयोग मिला। वह बलराज पहलवान से प्रेरित थे। योगेश्वर फ्रीस्टाइल पहलवान रहे हैं।
मौजूदा समय में दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में को पहलवानों की नर्सरी माना जाता है। इसी स्थान पर योगेश्वर ने 14 साल की उम्र से अभ्यास करना शुरू किया। लोकप्रिय कोच सतपाल सिंह से दत्त ने कुश्ती के दाव-पेच सीखे हैं। योगेश्वर का शुरुआती सफर संघर्षों से भरा था। उन्हें प्रतिदिन सोनीपत से ट्रेन से दिल्ली आना पड़ता था। लेकिन, लक्ष्य के प्रति समर्पण और उसे पाने के जुनून ने योगेश्वर के लिए दूरी और तमाम मुश्किलों को आसान बना दिया था।