Ram nath kovind
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फवाद मिर्जा को विरासत में मिली घुड़सवारी, एशियाई खेलों में खत्म किया पदक का सूखा
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IANS News
March 05, 2026 • 18:22 PM View: 349
Ram Nath Kovind: साल 1982 में रघुबीर सिंह के एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के बाद से भारत में घुड़सवारी का खेल कहीं खो सा गया था। हालांकि, टोक्यो ओलंपिक 2020 के लिए एक घुड़सवार ने क्वालीफाई किया और लंबे समय से चले आ रहे सूखे को खत्म कर दिया। यह खिलाड़ी कोई और नहीं, बल्कि फवाद मिर्जा रहे। फवाद को घुड़सवारी का खेल विरासत में मिला और उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से इस गेम में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं।
फवाद का जन्म कर्नाटक के बेंगलुरु में 6 मार्च 1992 को हुआ था। फवाद के पिता डॉ हसनिन घुड़सवार पशु चिकित्सक थे। यही कारण था कि फवाद बचपन से ही घोड़ों के आसपास रहे और उनका लगाव बढ़ता चला गया। फवाद ने न्यूजीलैंड के 7 बार ओलंपियन मार्क टॉड को अपना आदर्श माना और जल्द ही फवाद ने घुड़सवारी के खेल में ट्रेनिंग लेना शुरू कर दिया।
फवाद ने घुड़सवारी की ट्रेनिंग जर्मनी में ली और इस खेल में धीरे-धीरे महारत हासिल करते चले गए। जकार्ता में हुए एशियाई खेलों में फवाद का प्रदर्शन लाजवाब रहा। उन्होंने घुड़सवारी के खेल में लंबा सूखा खत्म करते हुए देश को रजत पदक दिलाया।
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