भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन के बीच पेपर लीक के मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि देश का भविष्य न्याय, पारदर्शिता और जवाबदेही का हकदार है।
कोहली ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "छात्र एक निष्पक्ष व्यवस्था, पारदर्शी परीक्षाओं और योग्यता पर आधारित भविष्य के हकदार हैं। छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। मुझे उम्मीद है कि अधिकारी उनकी शिकायतों के समाधान के लिए तत्काल और सार्थक कदम उठाएंगे। हमारे देश का भविष्य न्याय, पारदर्शिता और जवाबदेही का हकदार है।"
वहीं, पूर्व क्रिकेटर इरफान पठान का मानना है कि किसी भी पेपर लीक की वजह से छात्रों की बेहतर भविष्य की उम्मीद कभी नहीं टूटनी चाहिए। उन्होंने 'एक्स' पर लिखा, "हर छात्र बेहतर भविष्य के लिए वर्षों तक कड़ी मेहनत करता है और इस दौरान उनके परिवार भी कई तरह के त्याग करते हैं। किसी भी पेपर लीक की वजह से उनकी यह उम्मीद कभी नहीं टूटनी चाहिए। मुझे पूरा भरोसा है कि हमारा देश और संबंधित अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि प्रत्येक छात्र को बराबरी का मौका मिले। मुझे यह भी उम्मीद है कि ऐसा दोबारा कभी न हो, इसके लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।"
पूर्व क्रिकेटर शिखर धवन ने 'एक्स' पर लिखा, "हमारे युवा देश का भविष्य हैं। उनके सपनों को समझना जरूरी है, लेकिन साथ ही मुश्किल समय में धैर्य बनाए रखना और देश की संस्थाओं और सरकार पर भरोसा रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। मेरा मानना है कि धैर्य से ही हर चुनौती का समाधान निकलता है। भारत हमेशा आगे बढ़ा है और आगे भी तरक्की करता रहेगा।"
वहीं, पूर्व क्रिकेटर इरफान पठान का मानना है कि किसी भी पेपर लीक की वजह से छात्रों की बेहतर भविष्य की उम्मीद कभी नहीं टूटनी चाहिए। उन्होंने 'एक्स' पर लिखा, "हर छात्र बेहतर भविष्य के लिए वर्षों तक कड़ी मेहनत करता है और इस दौरान उनके परिवार भी कई तरह के त्याग करते हैं। किसी भी पेपर लीक की वजह से उनकी यह उम्मीद कभी नहीं टूटनी चाहिए। मुझे पूरा भरोसा है कि हमारा देश और संबंधित अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि प्रत्येक छात्र को बराबरी का मौका मिले। मुझे यह भी उम्मीद है कि ऐसा दोबारा कभी न हो, इसके लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।"
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सचिन तेंदुलकर ने 'एक्स' पर लिखा, "मेरे पिता एक प्रोफेसर थे। वे कई युवा छात्रों के लिए एक मार्गदर्शक और सलाहकार थे। उन्होंने मुझे शुरू से ही एक बात सिखाई थी, असफलता ठीक है, लेकिन चीटिंग करना नहीं। कभी भी शॉर्टकट न अपनाएं। समाज में बड़े होने के नाते, हमारी जिम्मेदारी है कि हम संस्कृति को सही दिशा दें। जो समाज मेहनत के बजाय नतीजों को ज्यादा अहमियत देता है, वह काबिलियत के बजाय शॉर्टकट को चुनता है। आज, जब छात्र निराश महसूस करते हैं कि उनकी कड़ी मेहनत का उन्हें फल नहीं मिला, तो उनकी निराशा समझ में आती है। हम सभी को मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें दोबारा ऐसा महसूस न हो।"